📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
अपराध
कोर्ट ने कहा, परिवार भारत में रहने पर नेपाली नागरिकता के कारण पैरोल नहीं रोका जा सकता
✍️ livelaw.in
🗓 16 सित. 2026, 08:31 AM
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एक न्यायिक निर्णय ने स्पष्ट किया कि यदि कैदी का परिवार भारत में रहता है तो केवल नेपाली नागरिकता के आधार पर पैरोल नहीं रोका जा सकता।
कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि किसी कैदी की नेपाली नागरिकता केवल इसलिए पैरोल से वंचित नहीं की जा सकती जब उसके निकटतम परिवार का निवास भारत में हो। निर्णय में कहा गया कि पैरोल के निर्णय को केवल राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं, बल्कि मामले की वास्तविक परिस्थितियों और परिवार की निकटता जैसे मानवीय पहलुओं पर आधारित होना चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सभी व्यक्तियों के समान अधिकारों की रक्षा करता है, चाहे उनका मूल कहीं भी हो।
यह निर्णय भविष्य में भारत में परिवार वाले विदेशी नागरिकों के पैरोल आवेदन पर असर डाल सकता है, जिससे निर्णय केवल राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं बल्कि ठोस मानदंडों पर आधारित होगा।
मामला तब उत्पन्न हुआ जब एक नेपाली नागरिक, जिसके पत्नी‑बच्चे भारत में रह रहे थे, ने परिवार के साथ रहने के लिए पैरोल का अनुरोध किया। प्रारम्भिक रूप से अधिकारियों ने उसकी विदेशी नागरिकता को कारण बताया और अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। अपील पर कोर्ट ने पैरोल से संबंधित कानूनी ढाँचे की समीक्षा की और यह निष्कर्ष निकाला कि केवल नागरिकता ही अस्वीकार का वैध कारण नहीं बन सकती। निर्णय में यह भी कहा गया कि परिवार की भलाई और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही पैरोल दिया जाना चाहिए।
यह निर्णय भविष्य में भारत में परिवार वाले विदेशी नागरिकों के पैरोल आवेदन पर असर डाल सकता है, जिससे निर्णय केवल राष्ट्रीयता के आधार पर नहीं बल्कि ठोस मानदंडों पर आधारित होगा।
मामला तब उत्पन्न हुआ जब एक नेपाली नागरिक, जिसके पत्नी‑बच्चे भारत में रह रहे थे, ने परिवार के साथ रहने के लिए पैरोल का अनुरोध किया। प्रारम्भिक रूप से अधिकारियों ने उसकी विदेशी नागरिकता को कारण बताया और अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। अपील पर कोर्ट ने पैरोल से संबंधित कानूनी ढाँचे की समीक्षा की और यह निष्कर्ष निकाला कि केवल नागरिकता ही अस्वीकार का वैध कारण नहीं बन सकती। निर्णय में यह भी कहा गया कि परिवार की भलाई और अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही पैरोल दिया जाना चाहिए।