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अपराध
अवैध तलाशी से प्री‑नैटल डायग्नोस्टिक केस नहीं रद्द, कोर्ट का फैसला
✍️ Live Law
🗓 19 सित. 2026, 06:46 AM
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि प्री‑नैटल डायग्नोस्टिक तकनीक अधिनियम के तहत दायर आपराधिक शिकायत को केवल अवैध तलाशी के कारण रद्द नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि प्री‑नैटल डायग्नोस्टिक तकनीक (PNDT) अधिनियम के तहत दायर आपराधिक शिकायत को केवल अवैध तलाशी के कारण रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने एक याचिका पर विचार किया, जिसमें तलाशी की अवैधता को कारण बनाकर केस को खारिज करने की मांग की गई थी।
अदालत ने यह स्वीकार किया कि प्रक्रिया में त्रुटि हुई है, परंतु यह कहा कि PNDT अधिनियम की वैधानिक संरचना के तहत शिकायत की वास्तविकता, जिसमें लिंग‑आधारित गर्भपात करने का इरादा शामिल है, का अलग से मूल्यांकन आवश्यक है। अवैध तलाशी गंभीर है, परंतु यह अकेले ही उस अभियोजन को निरस्त नहीं कर सकती, जो अन्य ठोस आरोपों पर आधारित है।
यह फैसला प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा और लिंग‑भेदभावपूर्ण गर्भपात को रोकने के विधायी उद्देश्य के बीच संतुलन स्थापित करने की न्यायपालिका की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय समान परिस्थितियों में निचली अदालतों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
अदालत ने यह स्वीकार किया कि प्रक्रिया में त्रुटि हुई है, परंतु यह कहा कि PNDT अधिनियम की वैधानिक संरचना के तहत शिकायत की वास्तविकता, जिसमें लिंग‑आधारित गर्भपात करने का इरादा शामिल है, का अलग से मूल्यांकन आवश्यक है। अवैध तलाशी गंभीर है, परंतु यह अकेले ही उस अभियोजन को निरस्त नहीं कर सकती, जो अन्य ठोस आरोपों पर आधारित है।
यह फैसला प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा और लिंग‑भेदभावपूर्ण गर्भपात को रोकने के विधायी उद्देश्य के बीच संतुलन स्थापित करने की न्यायपालिका की प्रवृत्ति को दर्शाता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय समान परिस्थितियों में निचली अदालतों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।