📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
राजनीति
राज्य चुनाव से पहले सिखिम पंचायतों में शक्ति अंतराल पर CAG ने उठाया सवाल
✍️ India Today NE
🗓 24 अग. 2026, 01:33 PM
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कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल ने बताया है कि सिखिम की पंचायतों को अभी भी पूर्ण वैधानिक शक्ति नहीं मिली है, जिससे आगामी स्थानीय चुनावों को लेकर चिंता बढ़ी है।
कंट्रोलर और ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया है कि सिखिम की ग्रामीण स्थानीय निकायों को अभी तक पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्धारित पूर्ण अधिकार नहीं मिले हैं। यह टिप्पणी राज्य में आगामी पंचायत चुनावों के निकट आने के कारण विशेष महत्व रखती है।
CAG के अनुसार, वित्तीय स्वायत्तता, विकास परियोजनाओं पर स्वतंत्र निर्णय और कुछ स्थानीय करों को वसूलने की शक्ति जैसे प्रमुख कार्य अभी भी आंशिक रूप से या पूरी तरह से पेंचायतों को नहीं सौंपे गए हैं। इस कमी के कारण पेंचायतें जमीनी स्तर की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा नहीं कर पा रही हैं।
राज्य सरकार ने इन अंतरालों को स्वीकार किया है, पर अभी तक इन अधिकारों के हस्तांतरण के लिए स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी है। नागरिक समाज के समूहों ने इस देरी की आलोचना की है, क्योंकि वे मानते हैं कि पूर्ण रूप से सशक्त पेंचायतें ही पारदर्शी और जवाबदेह स्थानीय शासन सुनिश्चित कर सकती हैं, विशेषकर चुनाव के समय।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव से पहले इन अंतरालों को दूर करना न केवल लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करेगा, बल्कि नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को बिना प्रक्रिया संबंधी अड़चन के अपने कार्यभार को तुरंत निभाने में मदद करेगा।
CAG के अनुसार, वित्तीय स्वायत्तता, विकास परियोजनाओं पर स्वतंत्र निर्णय और कुछ स्थानीय करों को वसूलने की शक्ति जैसे प्रमुख कार्य अभी भी आंशिक रूप से या पूरी तरह से पेंचायतों को नहीं सौंपे गए हैं। इस कमी के कारण पेंचायतें जमीनी स्तर की जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा नहीं कर पा रही हैं।
राज्य सरकार ने इन अंतरालों को स्वीकार किया है, पर अभी तक इन अधिकारों के हस्तांतरण के लिए स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी है। नागरिक समाज के समूहों ने इस देरी की आलोचना की है, क्योंकि वे मानते हैं कि पूर्ण रूप से सशक्त पेंचायतें ही पारदर्शी और जवाबदेह स्थानीय शासन सुनिश्चित कर सकती हैं, विशेषकर चुनाव के समय।
विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव से पहले इन अंतरालों को दूर करना न केवल लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करेगा, बल्कि नव निर्वाचित प्रतिनिधियों को बिना प्रक्रिया संबंधी अड़चन के अपने कार्यभार को तुरंत निभाने में मदद करेगा।