📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / DescriptionDibang Valley District.jpg
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स्थानीय
अलवर के अग्निवीर समुद्र सिंह का शरीर 80 दिन बाद अरुणाचल के दिबांग वैली बाढ़ में बरामद
✍️ Amar Ujala · Alwar
🗓 05 नव. 2026, 04:01 PM
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अग्निवीर समुद्र सिंह गुरजरा का शरीर, जो 14 अगस्त को दिबांग वैली में बाढ़ में लापता हुए थे, लगभग 80 दिन बाद बरामद हुआ और डीएनए परीक्षण से पहचान पुष्टि हुई।
अलवर के अग्निवीर समुद्र सिंह गुरजरा का शरीर, जो 14 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में अचानक बाढ़ के कारण लापता हुए थे, लगभग 80 दिन बाद बचाव दल द्वारा बरामद किया गया। यह खोज कार्य बुधवार सुबह शुरू हुआ, जब टीम ने बाढ़ के घटित होने के बाद बचे हुए कठिन‑पहुंच वाले नदी किनारे पर शव के अवशेष पाए।
14 अगस्त को भारी बादल फटने से दिबांग नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा, कई घरों को डुबो दिया और कई लोगों को फँसा दिया। समुद्र सिंह को लापता घोषित किया गया, और उनका परिवार कई हफ्तों से उनकी स्थिति जानने की प्रतीक्षा में रहा, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने कठिन भू‑प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण खोज में बाधाओं की सूचना दी।
खोज दल ने सोनार उपकरण और स्थानीय गाइडों की मदद से नदी के एक कठिन‑पहुंच वाले हिस्से में मानव अवशेष खोजे। इन अवशेषों को इटानगर के फोरेंसिक लैब में भेजा गया, जहाँ परिवार द्वारा प्रदान किए गए डीएनए नमूनों से तुलना कर पहचान की पुष्टि की गई।
परिवार को इस खबर से मिश्रित भावनाओं का सामना करना पड़ा – शोक के साथ अंततः सच्चाई का पता चलने से मिलने वाला कुछ राहत। यह घटना पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की जटिलताओं और बाढ़ के कई हफ्ते बाद भी सतत खोज कार्य की आवश्यकता को उजागर करती है।
14 अगस्त को भारी बादल फटने से दिबांग नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा, कई घरों को डुबो दिया और कई लोगों को फँसा दिया। समुद्र सिंह को लापता घोषित किया गया, और उनका परिवार कई हफ्तों से उनकी स्थिति जानने की प्रतीक्षा में रहा, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने कठिन भू‑प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण खोज में बाधाओं की सूचना दी।
खोज दल ने सोनार उपकरण और स्थानीय गाइडों की मदद से नदी के एक कठिन‑पहुंच वाले हिस्से में मानव अवशेष खोजे। इन अवशेषों को इटानगर के फोरेंसिक लैब में भेजा गया, जहाँ परिवार द्वारा प्रदान किए गए डीएनए नमूनों से तुलना कर पहचान की पुष्टि की गई।
परिवार को इस खबर से मिश्रित भावनाओं का सामना करना पड़ा – शोक के साथ अंततः सच्चाई का पता चलने से मिलने वाला कुछ राहत। यह घटना पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की जटिलताओं और बाढ़ के कई हफ्ते बाद भी सतत खोज कार्य की आवश्यकता को उजागर करती है।