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बांका: पैर गांव के दुर्गा मंदिर में 170 वर्षों से कलश की होती है पूजा, मां का होता है विशेष श्रृंगार
बांका जिले के धोरैया प्रखंड के पैर गांव के बाबू टोला में स्थित दुर्गा मंदिर अपनी 170 वर्षों से अधिक पुरानी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जहाँ माता की मूर्ति के स्थान पर कलश की पूजा की जाती है।
धोरैया प्रखंड के पैर गांव के बाबू टोला में स्थित दुर्गा मंदिर 170 वर्षों से अधिक समय से स्थापित है और अपनी अनूठी पूजा पद्धति के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चित है। यहाँ दुर्गा पूजा का आयोजन अत्यंत पारंपरिक तरीके से और भव्य सजावट के साथ किया जाता है।
पूजा के आयोजक दिनेश सिंह ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण किनवार राजपूत परिवार के पूर्वज, जमींदार बाबू शिवनारायण सिंह ने अपनी कुलदेवी के रूप में करवाया था। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ माता की मूर्ति स्थापित नहीं की जाती है। इसके बजाय, पांच दिनों तक कलश की पूजा की जाती है।
इस विशेष अवसर पर, किनवार वंश के सबसे बुजुर्ग सदस्य की पत्नी द्वारा माँ का श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है। दिनेश सिंह के अनुसार, साल भर में केवल इसी दिन माँ का श्रृंगार होता है और उसके बाद कलश पूजन की प्रक्रिया संपन्न होती है। यह परंपरा मंदिर को एक विशेष पहचान दिलाती है।
पूजा के आयोजक दिनेश सिंह ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण किनवार राजपूत परिवार के पूर्वज, जमींदार बाबू शिवनारायण सिंह ने अपनी कुलदेवी के रूप में करवाया था। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ माता की मूर्ति स्थापित नहीं की जाती है। इसके बजाय, पांच दिनों तक कलश की पूजा की जाती है।
इस विशेष अवसर पर, किनवार वंश के सबसे बुजुर्ग सदस्य की पत्नी द्वारा माँ का श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है। दिनेश सिंह के अनुसार, साल भर में केवल इसी दिन माँ का श्रृंगार होता है और उसके बाद कलश पूजन की प्रक्रिया संपन्न होती है। यह परंपरा मंदिर को एक विशेष पहचान दिलाती है।