📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
शिक्षा
बीजेपी सांसद‑विधायकों को 200 से अधिक पश्चिम बंगाल कॉलेज गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष नियुक्त, टीएमसी ने सरकार पर आरोप लगाया
✍️ Amar Ujala · Maharashtra
🗓 23 अग. 2026, 09:17 PM
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ट्रिनामूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 200 से अधिक कॉलेज गवर्निंग बॉडी में भाजपा सांसद‑विधायकों को अध्यक्ष नियुक्त करने की निंदा की, इसे पक्षपाती कदम कहा।
पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग ने घोषणा की कि 200 से अधिक कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी में वर्तमान भाजपा सांसद और विधायकों को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा। यह कदम, जो शैक्षणिक प्रशासन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी को बढ़ाने की नीति के तहत किया गया, विभिन्न कला, विज्ञान और तकनीकी संस्थानों में पार्टी के सदस्यों को प्रमुख पद पर रखता है।
शासन के प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की, यह कहते हुए कि यह सरकार द्वारा विपक्ष को पक्षपाती लाभ देने का प्रयास है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे नियुक्तियों से शैक्षणिक निर्णयों पर असर पड़ सकता है और कॉलेजों की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है।
वहीं राज्य के अधिकारियों ने इस कदम को जवाब देते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल करने से जवाबदेही बढ़ेगी और सार्वजनिक नीति के लक्ष्यों के साथ बेहतर तालमेल रहेगा। नियुक्ति मानदंड या शामिल कॉलेजों की विस्तृत सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह विवाद राज्य में चल रहे राजनीतिक टकराव में एक नया मोड़ जोड़ता है, जहाँ शिक्षा प्रशासन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियाँ अन्य राज्यों में भी अनुकरणीय हो सकती हैं, जिससे शिक्षण संस्थानों में राजनेताओं की भूमिका पर व्यापक बहस छिड़ सकती है।
शासन के प्रमुख दल तृणमूल कांग्रेस ने इस निर्णय की कड़ी निंदा की, यह कहते हुए कि यह सरकार द्वारा विपक्ष को पक्षपाती लाभ देने का प्रयास है। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि ऐसे नियुक्तियों से शैक्षणिक निर्णयों पर असर पड़ सकता है और कॉलेजों की स्वायत्तता कमजोर हो सकती है।
वहीं राज्य के अधिकारियों ने इस कदम को जवाब देते हुए कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को शामिल करने से जवाबदेही बढ़ेगी और सार्वजनिक नीति के लक्ष्यों के साथ बेहतर तालमेल रहेगा। नियुक्ति मानदंड या शामिल कॉलेजों की विस्तृत सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
यह विवाद राज्य में चल रहे राजनीतिक टकराव में एक नया मोड़ जोड़ता है, जहाँ शिक्षा प्रशासन तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच संघर्ष का केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नियुक्तियाँ अन्य राज्यों में भी अनुकरणीय हो सकती हैं, जिससे शिक्षण संस्थानों में राजनेताओं की भूमिका पर व्यापक बहस छिड़ सकती है।