बृजेश यादव के इस्तीफे से अध्यापकों में अक्रोश
बृजेश यादव के इस्तीफे से बेसिक शिक्षा विभाग में मची खलबलाहट
भ्रष्ट व्यवस्था से तंग आकर शिक्षा निरीक्षक बृजेश यादव ने दिया इस्तीफा, बेसिक शिक्षा कार्यालय में मची खलबली
आरोप: विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव और रिश्वतखोरी की मांग ने किया काम करना असंभव; मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए लिया सेवामुक्ति का निर्णय।
, अयोध्या:
जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब शिक्षा निरीक्षक पद पर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी बृजेश यादव ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। 04 नवंबर 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव और लगातार की जा रही रिश्वतखोरी की मांग को इसका मुख्य कारण बताया है।
"ईमानदारी से काम करना हुआ असंभव"
श्री यादव ने अपने त्यागपत्र में बेहद मार्मिक और तीखे शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने लिखा कि शासकीय सेवा में आने का उनका मूल उद्देश्य पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ शिक्षा विभाग और समाज की सेवा करना था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक लोक सेवक के रूप में उनके नैतिक मूल्य और अंतरात्मा उन्हें इस अनैतिक माहौल का हिस्सा बनने या भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने की अनुमति नहीं देते हैं।
त्यागपत्र के अनुसार, BSA कार्यालय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की मांगों के कारण अब ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना उनके लिए पूरी तरह असंभव हो गया है। उन्होंने कहा कि विभाग के 'समझौतावादी' और भ्रष्ट कार्य वातावरण के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बजाय उन्होंने इस सेवा से स्वेच्छा से मुक्त होने का कठिन निर्णय लिया है। उन्होंने BSA से अनुरोध किया है कि उनका त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।
अध्यापकों और प्रबंधकों का छलका दर्द
बृजेश यादव के इस्तीफे की खबर फैलते ही अयोध्या के तमाम सरकारी व निजी विद्यालयों के अध्यापकों और प्रबंधकों में भारी आक्रोश व निराशा देखी गई। क्षेत्र के प्रमुख शिक्षक नेताओं और प्रबंधकों—जिनमें राजेंद्र, राघवेंद्र कुमार, नीरज, पवन, संजय व अन्य कई अध्यापक शामिल हैं—ने एकजुट होकर उनके फैसले पर गहरा दुख व्यक्त किया।
शिक्षकों ने भावुक होकर कहा, "बृजेश जी जैसा ईमानदार, कर्मठ और सामाजिक व्यक्ति विभाग में मिलना कठिन है। वे हमेशा धरातल पर अध्यापकों की समस्याओं और भावनाओं को समझते थे। आज कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से एक सच्चे अधिकारी को इस्तीफा देना पड़ा, जो पूरे शिक्षा विभाग के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।"
विभाग में खलबली, जांच की मांग तेज
एक वरिष्ठ शिक्षा निरीक्षक के इस साहसिक कदम और गंभीर आरोपों के बाद बेसिक शिक्षा विभाग, अयोध्या में हड़कंप का माहौल है। सूत्रों के अनुसार, BSA कार्यालय के गलियारों में अब इस इस्तीफे और उसमें लगाए गए आरोपों को लेकर दबी जुबान में चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय शिक्षकों और प्रबुद्ध वर्ग ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि त्यागपत्र में उल्लेखित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
फोटो कैप्शन: भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ शिक्षा निरीक्षक बृजेश यादव के इस्तीफे पर चर्चा करते हुए अयोध्या के आक्रोशित अध्यापक और प्रबंधक।
आरोप: विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव और रिश्वतखोरी की मांग ने किया काम करना असंभव; मानसिक प्रताड़ना से बचने के लिए लिया सेवामुक्ति का निर्णय।
, अयोध्या:
जनपद के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब शिक्षा निरीक्षक पद पर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी बृजेश यादव ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। 04 नवंबर 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजे गए अपने त्यागपत्र में उन्होंने विभाग के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार, अनुचित दबाव और लगातार की जा रही रिश्वतखोरी की मांग को इसका मुख्य कारण बताया है।
"ईमानदारी से काम करना हुआ असंभव"
श्री यादव ने अपने त्यागपत्र में बेहद मार्मिक और तीखे शब्दों का प्रयोग किया है। उन्होंने लिखा कि शासकीय सेवा में आने का उनका मूल उद्देश्य पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ शिक्षा विभाग और समाज की सेवा करना था। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक लोक सेवक के रूप में उनके नैतिक मूल्य और अंतरात्मा उन्हें इस अनैतिक माहौल का हिस्सा बनने या भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने की अनुमति नहीं देते हैं।
त्यागपत्र के अनुसार, BSA कार्यालय स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की मांगों के कारण अब ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करना उनके लिए पूरी तरह असंभव हो गया है। उन्होंने कहा कि विभाग के 'समझौतावादी' और भ्रष्ट कार्य वातावरण के कारण मानसिक रूप से प्रताड़ित होने के बजाय उन्होंने इस सेवा से स्वेच्छा से मुक्त होने का कठिन निर्णय लिया है। उन्होंने BSA से अनुरोध किया है कि उनका त्यागपत्र तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।
अध्यापकों और प्रबंधकों का छलका दर्द
बृजेश यादव के इस्तीफे की खबर फैलते ही अयोध्या के तमाम सरकारी व निजी विद्यालयों के अध्यापकों और प्रबंधकों में भारी आक्रोश व निराशा देखी गई। क्षेत्र के प्रमुख शिक्षक नेताओं और प्रबंधकों—जिनमें राजेंद्र, राघवेंद्र कुमार, नीरज, पवन, संजय व अन्य कई अध्यापक शामिल हैं—ने एकजुट होकर उनके फैसले पर गहरा दुख व्यक्त किया।
शिक्षकों ने भावुक होकर कहा, "बृजेश जी जैसा ईमानदार, कर्मठ और सामाजिक व्यक्ति विभाग में मिलना कठिन है। वे हमेशा धरातल पर अध्यापकों की समस्याओं और भावनाओं को समझते थे। आज कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की वजह से एक सच्चे अधिकारी को इस्तीफा देना पड़ा, जो पूरे शिक्षा विभाग के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।"
विभाग में खलबली, जांच की मांग तेज
एक वरिष्ठ शिक्षा निरीक्षक के इस साहसिक कदम और गंभीर आरोपों के बाद बेसिक शिक्षा विभाग, अयोध्या में हड़कंप का माहौल है। सूत्रों के अनुसार, BSA कार्यालय के गलियारों में अब इस इस्तीफे और उसमें लगाए गए आरोपों को लेकर दबी जुबान में चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय शिक्षकों और प्रबुद्ध वर्ग ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि त्यागपत्र में उल्लेखित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
फोटो कैप्शन: भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ शिक्षा निरीक्षक बृजेश यादव के इस्तीफे पर चर्चा करते हुए अयोध्या के आक्रोशित अध्यापक और प्रबंधक।