📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Information and Public Relations Department, Gover
कृषि
बिहार में भैंस के मालिकाना हक के विवाद में आईपीएस ने दिया डीएनए परीक्षण का आदेश
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 26 अग. 2026, 12:37 PM
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बिहार में एक आईपीएस अधिकारी ने भैंस के मालिकाना हक के विवाद को सुलझाने के लिए डीएनए परीक्षण का आदेश दिया, जिससे कृषि संबंधी झगड़े में फोरेंसिक विज्ञान का अनोखा प्रयोग हुआ।
बिहार के एक ग्रामीण इलाके में भैंस के मालिकाना हक को लेकर दो पक्षों में तीव्र विवाद उत्पन्न हुआ, जहाँ दोनों ने कानूनी अधिकार का दावा किया। यह झगड़ा इतना बढ़ गया कि स्थानीय अधिकारियों को मध्यस्थता के लिए बुलाया गया।
एक असाधारण कदम के रूप में, इस मामले की देखरेख कर रहे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ने भैंस पर डीएनए परीक्षण का आदेश दिया। यह आदेश पशु की वंशावली स्थापित करके उसके सही मालिक को निर्धारित करने के लिए फोरेंसिक तकनीक का उपयोग करता है, जो पशुधन मामलों में कम ही देखा जाता है।
डीएनए नमूना पशु चिकित्सकों द्वारा एकत्रित कर पटना के मान्यताप्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि कुछ हफ्तों में प्रारम्भिक परिणाम मिलेंगे, जिसके बाद न्यायालय इन परिणामों के आधार पर मालिकाना हक का निर्णय लेगा।
यदि परीक्षण एक पक्ष के दावे को सिद्ध करता है, तो यह राज्य में भविष्य के कृषि संपत्ति विवादों में वैज्ञानिक साक्ष्य के उपयोग का एक उदाहरण बन सकता है, जिससे पशुधन संबंधी कानूनी लड़ाइयाँ कम हो सकती हैं।
एक असाधारण कदम के रूप में, इस मामले की देखरेख कर रहे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी ने भैंस पर डीएनए परीक्षण का आदेश दिया। यह आदेश पशु की वंशावली स्थापित करके उसके सही मालिक को निर्धारित करने के लिए फोरेंसिक तकनीक का उपयोग करता है, जो पशुधन मामलों में कम ही देखा जाता है।
डीएनए नमूना पशु चिकित्सकों द्वारा एकत्रित कर पटना के मान्यताप्राप्त फोरेंसिक प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। अधिकारियों का अनुमान है कि कुछ हफ्तों में प्रारम्भिक परिणाम मिलेंगे, जिसके बाद न्यायालय इन परिणामों के आधार पर मालिकाना हक का निर्णय लेगा।
यदि परीक्षण एक पक्ष के दावे को सिद्ध करता है, तो यह राज्य में भविष्य के कृषि संपत्ति विवादों में वैज्ञानिक साक्ष्य के उपयोग का एक उदाहरण बन सकता है, जिससे पशुधन संबंधी कानूनी लड़ाइयाँ कम हो सकती हैं।