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14 अक्टू. 2026•
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भोपाल में मप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की दो दिवसीय समीक्षा बैठक संपन्न, ई-केवायसी और ऋण वापसी पर जोर

✍️ रिपोर्टर: Pranav Gaur 🗓 14 अक्टू. 2026, 10:00 PM 👁 15
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भोपाल में 14 एवं 15 अक्टूबर 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय निगम की अध्यक्षता में जिला परियोजना प्रबंधकों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ई-केवायसी पूर्ण कराने, ऋण वापसी की सतत निगरानी और बैंक ऋणों के विस्तार पर विशेष बल दिया गया।

विकास भवन भोपाल के सभागार में 14 एवं 15 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधकों की दो दिवसीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। इस बैठक की अध्यक्षता मिशन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (IAS) श्री विनय निगम ने की। राज्य इकाई के साथ-साथ सभी जिलों के जिला परियोजना प्रबंधक इस बैठक में उपस्थित रहे, जबकि विकास खंड प्रबंधक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

बैठक के प्रारंभिक सत्र में, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री निगम ने जिलों को कुछ प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए। इनमें 21 से 31 अक्टूबर के बीच सभी संगठनों की आम सभा आयोजित कर समूह सदस्यों की ई-केवायसी का कार्य पूर्ण कराना शामिल है। अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पहले ही इस कार्य की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए जा चुके हैं और आगामी 12 नवंबर 2026 को एक वीसी में इसकी प्रगति की पुनः समीक्षा की जाएगी।

श्री निगम ने सीएलएफ (CLF) के माध्यम से समूहों को दिए गए ऋणों की समय पर वापसी की सतत निगरानी पर भी जोर दिया। उन्होंने ऋण वितरण, वापसी, रोटेशन और बकाया राशि जैसे बिंदुओं पर प्रत्येक विकास खंड प्रबंधक के साथ समीक्षा करने और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। लापरवाही बरतने वाले बीएम के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई। इसके अतिरिक्त, मिशन के अंतर्गत अब तक गठित कुल समूहों में से केवल 50 प्रतिशत को ही बैंक ऋण उपलब्ध होने पर चिंता व्यक्त करते हुए, सभी पात्र समूहों को बैंक ऋण उपलब्ध कराने और ऋण राशि से किए जा रहे कार्यों तथा सदस्यों की आय में वृद्धि की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में 'लखपति दीदी' योजना के तहत अगले तीन महीनों में 5 लाख से अधिक दीदियों को लखपति बनाने के लक्ष्य पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए जिलेवार लक्ष्य निर्धारित किए जा चुके हैं। क्लस्टर आधारित गतिविधियों के संचालन के लिए शासकीय भूमि पर वर्कशेड निर्माण के संबंध में भी दिशा-निर्देश दिए गए, जिसमें भूमि का मुख्य मार्ग के समीप होना और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। अनुपयोगी शासकीय भवनों को भी चिन्हित कर गतिविधियों हेतु आवंटित करने के निर्देश दिए गए।
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