देश
भूमि सर्वेक्षण के हर एक बिंदु की विस्तृत जानकारी
बिहार भूमि सर्वेक्षण के तहत ग्रामीणों को जो मुख्य बिंदु (Points) समझाए गए और जो हर रैयत (जमीन मालिक) के लिए जानने जरूरी हैं, वे निम्नलिखित हैं:
1. स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) भरना सबसे जरूरी
• क्या है: सभी जमीन मालिकों को अपने पास उपलब्ध भूमि की जानकारी खुद देनी होती है。 इसके लिए प्रपत्र-2 (Prapatra-2) भरना अनिवार्य है।
• दस्तावेज: इसके साथ जमीन की रसीद, केवाला (रजिस्ट्री डीड), या खतियान की कॉपी लगानी होती है।
2. वंशावली (प्रपत्र-3(i)) का महत्व
• पूर्वजों की जमीन के लिए: यदि जमीन दादा-परदादा या माता-पिता के नाम पर है (जिनका देहांत हो चुका है), तो आवेदकों को प्रपत्र-3(i) में अपनी वंशावली (Family Tree) बनाकर देनी होती है।
• सत्यापन: इस वंशावली को सादे कागज पर बनाकर ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य या सरपंच/मुखिया से सत्यापित करवाना होता है, ताकि उत्तराधिकार का दावा मजबूत हो सके।
3. सर्वे का मुख्य उद्देश्य
• विवादों का निपटारा: इस सर्वे का मकसद किसी की जमीन छीनना नहीं, बल्कि जमीन के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और आधुनिक बनाना है। इससे भविष्य में होने वाले जमीनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति मिलेगी।
• नया खतियान और नक्शा: सर्वे पूरा होने के बाद हर जमीन मालिक को एक नया, स्पष्ट डिजिटल खतियान और डिजिटल नक्शा मिलेगा।
4. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं
• ऑनलाइन विकल्प: ग्रामीण घर बैठे Directorate of Land Records and Survey (DLRS) की वेबसाइट पर जाकर प्रपत्र डाउनलोड कर सकते हैं और उसे ऑनलाइन अपलोड भी कर सकते हैं।
• ऑफलाइन विकल्प: जो लोग ऑनलाइन नहीं कर सकते, वे सीधे अपने अंचल (Block) के शिविर में नियुक्त विशेष सर्वेक्षण अमीन या कानूनगो के पास जाकर फॉर्म और दस्तावेज भौतिक रूप से जमा कर सकते हैं।
5. घबराने की जरूरत नहीं (अपील और सुधार का मौका)
• शिविर में अधिकारियों द्वारा यह भी साफ किया गया होगा कि यदि सर्वे के दौरान किसी की जमीन में कोई त्रुटि या गड़बड़ी दिखती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
• प्रारूप प्रकाशन (Draft Publication) के बाद ग्रामीणों को दावा-आपत्ति (Objection) दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है, जिसके बाद ही अंतिम रिकॉर्ड तैयार होगा।
1. स्व-घोषणा (प्रपत्र-2) भरना सबसे जरूरी
• क्या है: सभी जमीन मालिकों को अपने पास उपलब्ध भूमि की जानकारी खुद देनी होती है。 इसके लिए प्रपत्र-2 (Prapatra-2) भरना अनिवार्य है।
• दस्तावेज: इसके साथ जमीन की रसीद, केवाला (रजिस्ट्री डीड), या खतियान की कॉपी लगानी होती है।
2. वंशावली (प्रपत्र-3(i)) का महत्व
• पूर्वजों की जमीन के लिए: यदि जमीन दादा-परदादा या माता-पिता के नाम पर है (जिनका देहांत हो चुका है), तो आवेदकों को प्रपत्र-3(i) में अपनी वंशावली (Family Tree) बनाकर देनी होती है।
• सत्यापन: इस वंशावली को सादे कागज पर बनाकर ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य या सरपंच/मुखिया से सत्यापित करवाना होता है, ताकि उत्तराधिकार का दावा मजबूत हो सके।
3. सर्वे का मुख्य उद्देश्य
• विवादों का निपटारा: इस सर्वे का मकसद किसी की जमीन छीनना नहीं, बल्कि जमीन के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल और आधुनिक बनाना है। इससे भविष्य में होने वाले जमीनी विवादों और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति मिलेगी।
• नया खतियान और नक्शा: सर्वे पूरा होने के बाद हर जमीन मालिक को एक नया, स्पष्ट डिजिटल खतियान और डिजिटल नक्शा मिलेगा।
4. ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं
• ऑनलाइन विकल्प: ग्रामीण घर बैठे Directorate of Land Records and Survey (DLRS) की वेबसाइट पर जाकर प्रपत्र डाउनलोड कर सकते हैं और उसे ऑनलाइन अपलोड भी कर सकते हैं।
• ऑफलाइन विकल्प: जो लोग ऑनलाइन नहीं कर सकते, वे सीधे अपने अंचल (Block) के शिविर में नियुक्त विशेष सर्वेक्षण अमीन या कानूनगो के पास जाकर फॉर्म और दस्तावेज भौतिक रूप से जमा कर सकते हैं।
5. घबराने की जरूरत नहीं (अपील और सुधार का मौका)
• शिविर में अधिकारियों द्वारा यह भी साफ किया गया होगा कि यदि सर्वे के दौरान किसी की जमीन में कोई त्रुटि या गड़बड़ी दिखती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है।
• प्रारूप प्रकाशन (Draft Publication) के बाद ग्रामीणों को दावा-आपत्ति (Objection) दर्ज कराने के लिए पर्याप्त समय दिया जाता है, जिसके बाद ही अंतिम रिकॉर्ड तैयार होगा।