📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ms Sarah Welch
विज्ञान
आर्कियोलॉजिस्ट ने पूर्वोत्तर भारत में मानव इतिहास को 3,500 साल आगे बढ़ाया
✍️ The Times of India
🗓 23 अग. 2026, 09:02 PM
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नई पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि पूर्वोत्तर भारत में मानव बस्ती पहले से 3,500 साल पुरानी हो सकती है, जिससे प्रागैतिहासिक काल का पुनर्मूल्यांकन आवश्यक हो गया है।
पूर्वोत्तर भारत में काम कर रहे पुरातत्वविदों ने ऐसे साक्ष्य पाए हैं जो यह दर्शाते हैं कि मानव उपस्थिति पहले से 3,500 साल पुरानी हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि हालिया खुदाई में मिली वस्तुएँ और भू-परतें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि इस क्षेत्र में मानव बस्ती का समय पहले के अनुमान से काफी पुराना है।
इन खोजों ने इस क्षेत्र की स्थापित कालक्रम को चुनौती दी है, जिसे अब तक एक बाद के प्रागैतिहासिक काल में रखा जाता था। विद्वान मानते हैं कि यह नई जानकारी प्रवास मार्गों, सांस्कृतिक विकास और शुरुआती होलोसीन काल में पड़ोसी क्षेत्रों के साथ संपर्क को पुनः परिभाषित कर सकती है।
हालांकि खोजे गये स्थल, वस्तुओं के प्रकार और प्रयुक्त वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हुई है, लेकिन यह घोषणा भारत के पूर्वोत्तर में निरंतर पुरातात्विक अनुसंधान के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञ आशा करते हैं कि आगे की जांचें यह स्पष्ट करेंगी कि प्रारम्भिक समुदायों ने इस विविध भू-भाग में कैसे अनुकूलन किया।
यदि आगे के अध्ययन इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं, तो इस संशोधित समयरेखा का दक्षिण एशिया के इतिहास पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा, जिससे यह सिद्ध हो सकता है कि मानव समूह इस क्षेत्र में पहले से अधिक समय से बसे हुए थे।
इन खोजों ने इस क्षेत्र की स्थापित कालक्रम को चुनौती दी है, जिसे अब तक एक बाद के प्रागैतिहासिक काल में रखा जाता था। विद्वान मानते हैं कि यह नई जानकारी प्रवास मार्गों, सांस्कृतिक विकास और शुरुआती होलोसीन काल में पड़ोसी क्षेत्रों के साथ संपर्क को पुनः परिभाषित कर सकती है।
हालांकि खोजे गये स्थल, वस्तुओं के प्रकार और प्रयुक्त वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं हुई है, लेकिन यह घोषणा भारत के पूर्वोत्तर में निरंतर पुरातात्विक अनुसंधान के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञ आशा करते हैं कि आगे की जांचें यह स्पष्ट करेंगी कि प्रारम्भिक समुदायों ने इस विविध भू-भाग में कैसे अनुकूलन किया।
यदि आगे के अध्ययन इस निष्कर्ष की पुष्टि करते हैं, तो इस संशोधित समयरेखा का दक्षिण एशिया के इतिहास पर भी व्यापक प्रभाव पड़ेगा, जिससे यह सिद्ध हो सकता है कि मानव समूह इस क्षेत्र में पहले से अधिक समय से बसे हुए थे।