📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Arjunaraoc
सरकारी योजना
आंध्र प्रदेश ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए नई नीति लागू की
✍️ The Indian Express
🗓 22 अग. 2026, 03:39 PM
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आंध्र प्रदेश सरकार ने शहरों में दुर्घटनाओं और मौतों को घटाने के लिए एक व्यापक पैदल यात्री सुरक्षा योजना शुरू की है।
आंध्र प्रदेश सरकार ने एक नई पैदल यात्री सुरक्षा नीति की घोषणा की है, जिसमें फुटपाथों के लिए कड़े डिजाइन मानक, अनिवार्य पारगमन स्थल और पैदल यात्रियों से जुड़े ट्रैफ़िक उल्लंघनों पर अधिक दंड शामिल हैं। इस योजना में फुटपाथों का विस्तार, दृष्टिहीन लोगों के लिए टैक्टाइल पेविंग की स्थापना और जोखिमपूर्ण चौराहों पर ट्रैफ़िक वार्डन की तैनाती शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि यह नीति राज्य की व्यापक सड़क‑सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आंध्र प्रदेश में पैदल यात्रियों की मृत्यु दर को राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप लाना है। राज्य परिवहन विभाग के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में पैदल यात्रियों की मौतें लगातार बढ़ रही थीं, जिससे सरकार ने कदम उठाए।
इस नीति को राजधानी अमरावती और अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में लागू किया जाएगा, और प्रारंभिक चरण छह महीने तक चलने की योजना है। स्थानीय NGOs और स्कूलों के सहयोग से सार्वजनिक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, ताकि नागरिक सुरक्षित चलने के बारे में शिक्षित हों।
परिवहन मंत्री के. वी. पी. राव ने बताया कि इस योजना की सफलता के लिए सख्त प्रवर्तन और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक होगी। नीति का वार्षिक मूल्यांकन किया जाएगा ताकि उसके प्रभाव को मापा जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
यदि यह प्रभावी सिद्ध होती है, तो आंध्र प्रदेश की पहल अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो समान सड़क‑सुरक्षा समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह नीति राज्य की व्यापक सड़क‑सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य आंध्र प्रदेश में पैदल यात्रियों की मृत्यु दर को राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप लाना है। राज्य परिवहन विभाग के आंकड़े दिखाते हैं कि पिछले पाँच वर्षों में पैदल यात्रियों की मौतें लगातार बढ़ रही थीं, जिससे सरकार ने कदम उठाए।
इस नीति को राजधानी अमरावती और अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में लागू किया जाएगा, और प्रारंभिक चरण छह महीने तक चलने की योजना है। स्थानीय NGOs और स्कूलों के सहयोग से सार्वजनिक जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे, ताकि नागरिक सुरक्षित चलने के बारे में शिक्षित हों।
परिवहन मंत्री के. वी. पी. राव ने बताया कि इस योजना की सफलता के लिए सख्त प्रवर्तन और सामुदायिक भागीदारी आवश्यक होगी। नीति का वार्षिक मूल्यांकन किया जाएगा ताकि उसके प्रभाव को मापा जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें।
यदि यह प्रभावी सिद्ध होती है, तो आंध्र प्रदेश की पहल अन्य भारतीय राज्यों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो समान सड़क‑सुरक्षा समस्याओं का सामना कर रहे हैं।