📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Lepel Henry Griffin
राजनीति
मजीठा में AAP ने बिक्रम मजीठिया पर तीखा हमला, तलवीर गिल ने लगाए गंभीर आरोप
✍️ Amar Ujala · Amritsar
🗓 02 सित. 2026, 03:08 PM
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मजीठा में AAP ने शिमला अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया पर तीखा हमला किया, जबकि तलवीर गिल ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए।
पंजाब के शहर मजीठा में मंगलवार को राजनीतिक तनाव की लहर दौड़ी, जब आम आदमी पार्टी (AAP) ने शिमला अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया पर सार्वजनिक रूप से आलोचना की। पार्टी के प्रतिनिधियों ने मजीठिया के हालिया कार्यों को जनता के हित के विरुद्ध बताया और जवाबदेही की माँग की।
इसी सभा में AAP के प्रवक्ता ने मजीठिया के लेन‑देनों में पारदर्शिता की आवश्यकता दोहराई, और राज्य प्रशासन से किसी भी संभावित अनियमितता की जांच करने का आग्रह किया। पार्टी ने इस आलोचना को प्रदेश में भ्रष्टाचार को रोकने के अपने व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया।
कार्यकर्ता तलवीर गिल ने AAP के साथ मिलकर मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाए। गिल ने कहा कि नेता ने कानूनी और नैतिक मानदंडों का उल्लंघन किया है, हालांकि उन्होंने अपने बयान में विशिष्ट विवरण नहीं दिया।
इन टिप्पणियों के बाद एक औपचारिक जांच की मांग बढ़ी, और विपक्षी दल व स्थानीय नागरिक समाज समूहों ने अधिकारियों से इन आरोपों की जाँच करने का आग्रह किया। अब तक मजीठिया या उनकी पार्टी से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह घटना आगामी चुनावों के मद्देनज़र पंजाब में बढ़ती राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को उजागर करती है, जहाँ स्थानीय नेताओं को प्रतिद्वंद्वी दलों और सक्रिय आवाज़ों द्वारा कड़ी नज़र से देखा जा रहा है।
इसी सभा में AAP के प्रवक्ता ने मजीठिया के लेन‑देनों में पारदर्शिता की आवश्यकता दोहराई, और राज्य प्रशासन से किसी भी संभावित अनियमितता की जांच करने का आग्रह किया। पार्टी ने इस आलोचना को प्रदेश में भ्रष्टाचार को रोकने के अपने व्यापक प्रयास का हिस्सा बताया।
कार्यकर्ता तलवीर गिल ने AAP के साथ मिलकर मजीठिया पर गंभीर आरोप लगाए। गिल ने कहा कि नेता ने कानूनी और नैतिक मानदंडों का उल्लंघन किया है, हालांकि उन्होंने अपने बयान में विशिष्ट विवरण नहीं दिया।
इन टिप्पणियों के बाद एक औपचारिक जांच की मांग बढ़ी, और विपक्षी दल व स्थानीय नागरिक समाज समूहों ने अधिकारियों से इन आरोपों की जाँच करने का आग्रह किया। अब तक मजीठिया या उनकी पार्टी से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
यह घटना आगामी चुनावों के मद्देनज़र पंजाब में बढ़ती राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को उजागर करती है, जहाँ स्थानीय नेताओं को प्रतिद्वंद्वी दलों और सक्रिय आवाज़ों द्वारा कड़ी नज़र से देखा जा रहा है।