📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Information and Broadcasting
कृषि
नालंदा के 361 सरकारी जलकरों की होगी नीलामी, पट्टा मिलेगा जून 2027 तक
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 31 अग. 2026, 08:32 AM
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बिहार सरकार 15 सितंबर से नालंदा के 14 प्रखंडों में 361 सरकारी जलकरों की नीलामी करेगी, पट्टे की अवधि जून 2027 तक रहेगी, जिससे मत्स्य पालन को बढ़ावा और राजस्व में वृद्धि होगी।
राज्य प्रशासन ने घोषणा की कि नालंदा जिले के 14 प्रखंडों में 361 सरकारी जलकर, जिसमें तालाब और आहार शामिल हैं, की नीलामी 15 सितंबर से शुरू की जाएगी। प्रत्येक पट्टा अधिकतम जून 2027 तक रहेगा, जिसके बाद अधिकार सरकार को वापस मिलेंगे। यह कदम इन जल संसाधनों के वाणिज्यिक उपयोग को साकार करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह नीलामी बिहार में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। निजी उद्यमियों को जलकरों का प्रबंधन सौंपने से मछली उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय पोषण में सुधार होगा।
पट्टे से प्राप्त आय राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करेगी। नीलामी एक पारदर्शी ऑनलाइन मंच के माध्यम से की जाएगी, जिसमें इच्छुक पक्षों को बोली प्रस्तुत करनी होगी और पर्यावरण एवं संचालन संबंधी नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल अन्य जिलों में समान कार्यक्रमों के लिए मॉडल स्थापित करेगी।
किसान समूह और मत्स्य पालन विशेषज्ञ इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि बेहतर प्रबंधन से मछली की पैदावार बढ़ेगी और जल संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होगा।
अधिकारियों ने बताया कि यह नीलामी बिहार में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। निजी उद्यमियों को जलकरों का प्रबंधन सौंपने से मछली उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय पोषण में सुधार होगा।
पट्टे से प्राप्त आय राज्य की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करेगी। नीलामी एक पारदर्शी ऑनलाइन मंच के माध्यम से की जाएगी, जिसमें इच्छुक पक्षों को बोली प्रस्तुत करनी होगी और पर्यावरण एवं संचालन संबंधी नियमों का पालन करना होगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल अन्य जिलों में समान कार्यक्रमों के लिए मॉडल स्थापित करेगी।
किसान समूह और मत्स्य पालन विशेषज्ञ इस कदम का स्वागत कर रहे हैं, क्योंकि बेहतर प्रबंधन से मछली की पैदावार बढ़ेगी और जल संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होगा।