📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / SerChevalerie
वायरल
बेंगलुरु में ज़ोमैटो कर्मचारी ने टीम को हिंदी सीखने या छोड़ने का आदेश, वीडियो वायरल
✍️ indiatoday.in
🗓 06 अक्टू. 2026, 08:18 AM
👁 23
बेंगलुरु के ज़ोमैटो कर्मचारी ने सहकर्मियों को हिंदी सीखने या नौकरी छोड़ने का निर्देश दिया, वीडियो ने ऑनलाइन चर्चा को भड़का दिया।
बेंगलुरु स्थित ज़ोमैटो के एक कार्यालय में रिकॉर्ड किया गया वीडियो दिखाता है कि एक कर्मचारी ने अपनी टीम को कहा कि या तो वे हिंदी में निपुण हों या नौकरी छोड़ दें। यह क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट होने के बाद कई हज़ार व्यूज़ हासिल कर भाषा नीति पर तीखा बहस छिड़ गया।
कर्मचारी अधिकार संगठनों ने इस टिप्पणी की निंदा की है, यह कहते हुए कि भाषा की अनिवार्य मांग व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन कर सकती है और गैर‑हिंदी बोलने वाले कर्मचारियों को बाहर कर सकती है। ज़ोमैटो ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इस विवाद को सुलझाने के लिए चर्चा चल रही है।
यह घटना उस समय आई है जब कई भारतीय कंपनियों को अपने विविध कार्यबल में भाषा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि कंपनियां संचार के लिए उचित मानक तय कर सकती हैं, बिना स्पष्ट कारण के किसी विशेष भाषा को अनिवार्य करना श्रम नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
सोशल मीडिया पर राय विभाजित है; कुछ लोग संचालन को सुगम बनाने के लिए एक सामान्य भाषा की आवश्यकता का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य इसे बहिष्कारी मानते हैं। आगे और जानकारी मिलने पर यह बहस जारी रहने की संभावना है।
कर्मचारी अधिकार संगठनों ने इस टिप्पणी की निंदा की है, यह कहते हुए कि भाषा की अनिवार्य मांग व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन कर सकती है और गैर‑हिंदी बोलने वाले कर्मचारियों को बाहर कर सकती है। ज़ोमैटो ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार इस विवाद को सुलझाने के लिए चर्चा चल रही है।
यह घटना उस समय आई है जब कई भारतीय कंपनियों को अपने विविध कार्यबल में भाषा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जबकि कंपनियां संचार के लिए उचित मानक तय कर सकती हैं, बिना स्पष्ट कारण के किसी विशेष भाषा को अनिवार्य करना श्रम नियमों के विरुद्ध हो सकता है।
सोशल मीडिया पर राय विभाजित है; कुछ लोग संचालन को सुगम बनाने के लिए एक सामान्य भाषा की आवश्यकता का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य इसे बहिष्कारी मानते हैं। आगे और जानकारी मिलने पर यह बहस जारी रहने की संभावना है।