📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rohitjangidartist
जीवनशैली
युवा भारतीय कलाकारों ने स्मृति, पहचान और पर्यावरण पर हाथ से बनी कला में खोज
✍️ The Times of India
🗓 01 नव. 2026, 06:54 AM
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एक बढ़ते समूह के युवा भारतीय कलाकार हाथ से बनी तकनीकों को अपनाकर स्मृति, पहचान और पर्यावरणीय मुद्दों की पड़ताल कर रहे हैं।
उभरते भारतीय कलाकारों का एक नया समूह हाथ से बनी कारीगरी जैसे बुनाई, मिट्टी की कला, कागज़‑क्राफ्ट और प्राकृतिक रंगों को अपनाकर जटिल विचारों को अभिव्यक्त कर रहा है। उनका काम केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं, बल्कि अमूर्त अवधारणाओं को ठोस रूप में बंधन देता है।
कलाकार स्मृति, व्यक्तिगत पहचान और पर्यावरणीय जागरूकता को अपने काम का मूल मानते हैं। पारम्परिक सामग्री को आकार देकर वे खोई हुई सांस्कृतिक कहानियों को पुनर्जीवित करने, तेज़ शहरीकरण के दबावों का सामना करने और मनुष्य‑प्रकृति के नाजुक संबंध को उजागर करने का प्रयास करते हैं।
हाल ही में प्रमुख शहरों में आयोजित प्रदर्शनों ने इन कृतियों को मंच दिया, जिससे क्यूरेटर और पर्यावरण समूहों का ध्यान आकर्षित हुआ। समीक्षकों का मानना है कि इस कला की स्पर्शनीय प्रकृति दर्शकों को गहरी सोच में ले जाती है, जिससे लोगों और ग्रह के आपसी इतिहास पर विचार उत्पन्न होता है।
कलाकार स्मृति, व्यक्तिगत पहचान और पर्यावरणीय जागरूकता को अपने काम का मूल मानते हैं। पारम्परिक सामग्री को आकार देकर वे खोई हुई सांस्कृतिक कहानियों को पुनर्जीवित करने, तेज़ शहरीकरण के दबावों का सामना करने और मनुष्य‑प्रकृति के नाजुक संबंध को उजागर करने का प्रयास करते हैं।
हाल ही में प्रमुख शहरों में आयोजित प्रदर्शनों ने इन कृतियों को मंच दिया, जिससे क्यूरेटर और पर्यावरण समूहों का ध्यान आकर्षित हुआ। समीक्षकों का मानना है कि इस कला की स्पर्शनीय प्रकृति दर्शकों को गहरी सोच में ले जाती है, जिससे लोगों और ग्रह के आपसी इतिहास पर विचार उत्पन्न होता है।