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मनोरंजन
लेखकों और फिल्म निर्माताओं ने सिक्किम कला‑साहित्य महोत्सव में रचनात्मक विरोध के स्वर उठाए
✍️ Hindustan Times
🗓 30 अक्टू. 2026, 05:37 PM
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सिक्किम कला‑साहित्य महोत्सव में लेखकों और फिल्म निर्माताओं ने रचनात्मक अभिव्यक्ति को विरोध के साधन के रूप में चर्चा की।
सिक्किम कला‑साहित्य महोत्सव में एक पैनल में भाग लेने वाले लेखकों और फिल्म निर्माताओं ने रचनात्मक माध्यमों को विरोध के साधन के रूप में उपयोग करने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने बताया कि साहित्य, सिनेमा और अन्य कला रूपों के माध्यम से सामाजिक असंतोष को अभिव्यक्त किया जा सकता है, जबकि सेंसरशिप और राजनीतिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखा जाता है।
महोत्सव के सांस्कृतिक क्यूरेटर ने सत्र का संचालन किया और हाल के उन उदाहरणों पर प्रकाश डाला जहाँ कहानी कहने ने पर्यावरणीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक बहसों तक विभिन्न सामाजिक समस्याओं को उजागर किया है। वक्ताओं ने कहा कि कलात्मक विरोध पारंपरिक रैलियों से परे जाकर भावनात्मक रूप से गहरी कहानियों के माध्यम से जनता तक पहुँच सकता है।
आयोजकों ने बताया कि यह सत्र महोत्सव के व्यापक लक्ष्य—रचनाकारों और जनता के बीच संवाद को बढ़ावा देना—को दर्शाता है, जिससे जिम्मेदार और साहसी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिलता है। छात्रों और स्थानीय कलाकारों सहित दर्शकों ने इस चर्चा को सकारात्मक रूप से सराहा, यह मानते हुए कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में ऐसी बातचीत का महत्व बढ़ गया है।
सिक्किम कला‑साहित्य महोत्सव, जो हर साल राज्य की राजधानी में आयोजित होता है, विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों, लेखकों और विद्वानों को एक साथ लाने वाला मंच बना हुआ है।
महोत्सव के सांस्कृतिक क्यूरेटर ने सत्र का संचालन किया और हाल के उन उदाहरणों पर प्रकाश डाला जहाँ कहानी कहने ने पर्यावरणीय मुद्दों से लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक बहसों तक विभिन्न सामाजिक समस्याओं को उजागर किया है। वक्ताओं ने कहा कि कलात्मक विरोध पारंपरिक रैलियों से परे जाकर भावनात्मक रूप से गहरी कहानियों के माध्यम से जनता तक पहुँच सकता है।
आयोजकों ने बताया कि यह सत्र महोत्सव के व्यापक लक्ष्य—रचनाकारों और जनता के बीच संवाद को बढ़ावा देना—को दर्शाता है, जिससे जिम्मेदार और साहसी अभिव्यक्ति को प्रोत्साहन मिलता है। छात्रों और स्थानीय कलाकारों सहित दर्शकों ने इस चर्चा को सकारात्मक रूप से सराहा, यह मानते हुए कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में ऐसी बातचीत का महत्व बढ़ गया है।
सिक्किम कला‑साहित्य महोत्सव, जो हर साल राज्य की राजधानी में आयोजित होता है, विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों, लेखकों और विद्वानों को एक साथ लाने वाला मंच बना हुआ है।