📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Housing and Urban Affairs
देश
विश्व बैंक ने कहा 49 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर
✍️ India Today
🗓 31 अक्टू. 2026, 06:23 AM
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विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 49 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से ऊपर पहुँच चुके हैं, जिससे देश में अत्यधिक गरीबी में उल्लेखनीय गिरावट आई है।
विश्व बैंक ने नई आँकड़े जारी किए हैं, जिनके अनुसार भारत में 49 करोड़ लोग अब राष्ट्रीय गरीबी रेखा से ऊपर रह रहे हैं, जो पिछले आँकड़ों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है। यह डेटा घरानों के सर्वेक्षण और आर्थिक संकेतकों को मिलाकर तैयार किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गरीबी उन्मूलन योजनाओं और निरंतर आर्थिक विकास ने इस सुधार में योगदान दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बड़े आंकड़े के बावजूद, क्षेत्रीय असमानताएँ बनी हुई हैं, कई राज्यों में अभी भी गरीबी की उच्च दरें दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में निरंतर निवेश की आवश्यकता पर बल दिया गया है, ताकि इस प्रगति को बनाए रखा जा सके। विश्व बैंक और भारतीय वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि यह परिणाम नीति निरंतरता और लक्षित सामाजिक सुरक्षा जाल के महत्व को रेखांकित करता है।
विश्व बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा $2.15 प्रति दिन (खरीदी शक्ति समानता के अनुसार) को आधार बनाकर प्रगति का आकलन किया है। एजेंसी के अनुसार, पिछले दशक में भारत का वैश्विक गरीबी में हिस्सा काफी घटा है, जो जनसांख्यिकीय बदलाव और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को दर्शाता है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि भविष्य में आर्थिक झटके इन उपलब्धियों को उलट सकते हैं, यदि उचित राजकोषीय उपाय न अपनाए जाएँ।
नीति निर्माताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे आगामी बजट चर्चाओं में इस रिपोर्ट की सिफ़ारिशों की समीक्षा करेंगे, और समावेशी विकास रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे शेष गरीबी‑ग्रस्त क्षेत्रों को सुधारा जा सके। यह डेटा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण जैसी प्रमुख योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए भी एक मानक के रूप में काम करेगा।
विश्व बैंक ने अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा $2.15 प्रति दिन (खरीदी शक्ति समानता के अनुसार) को आधार बनाकर प्रगति का आकलन किया है। एजेंसी के अनुसार, पिछले दशक में भारत का वैश्विक गरीबी में हिस्सा काफी घटा है, जो जनसांख्यिकीय बदलाव और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि को दर्शाता है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि भविष्य में आर्थिक झटके इन उपलब्धियों को उलट सकते हैं, यदि उचित राजकोषीय उपाय न अपनाए जाएँ।
नीति निर्माताओं से उम्मीद की जा रही है कि वे आगामी बजट चर्चाओं में इस रिपोर्ट की सिफ़ारिशों की समीक्षा करेंगे, और समावेशी विकास रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, जिससे शेष गरीबी‑ग्रस्त क्षेत्रों को सुधारा जा सके। यह डेटा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम और प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण जैसी प्रमुख योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करने के लिए भी एक मानक के रूप में काम करेगा।