📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
टेक्नोलॉजी
पश्चिम बंगाल के जजों को पाँच दिनों में डिजिटल सिग्नेचर, स्टैंडऑफ़ का अंत
✍️ The Economic Times
🗓 03 नव. 2026, 01:01 AM
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राज्य सरकार ने कहा कि पश्चिम बंगाल के SIR जजों को पाँच दिनों में डिजिटल सिग्नेचर मिलेंगे, जिससे एक महीने के विवाद का अंत होगा।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल – राज्य प्रशासन ने घोषणा की कि विशेष सूचना भंडार (SIR) से जुड़े जजों को अगले पाँच दिनों में डिजिटल सिग्नेचर प्रदान किए जाएंगे। यह कदम एक महीने से चल रहे विवाद को समाप्त करेगा, जिसमें न्यायपालिका ने इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर की सुरक्षा और प्रामाणिकता को लेकर आपत्ति जताई थी।
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब राज्य के आईटी विभाग ने जजों की सहमति के बिना नया ई‑सिग्नेचर प्लेटफ़ॉर्म लागू किया, जिससे कई कोर्ट प्रक्रियाओं में रुकावट आई। हाई कोर्ट और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के बीच हुए वार्तालापों के बाद अब डिजिटल सिग्नेचर शीघ्र जारी करने का समझौता हुआ है।
अधिकारी बताते हैं कि डिजिटल प्रमाणपत्र एक मान्य क्रिप्टोग्राफ़िक सेवा प्रदाता के माध्यम से उत्पन्न किए जाएंगे और भारतीय सरकार के ई‑साइन फ्रेमवर्क के अनुरूप होंगे। इस व्यवस्था से जज आदेश, नोटिस और अन्य न्यायिक दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन कर सकेंगे, जिससे केस प्रबंधन में तेजी आएगी और कागजी कार्य कम होगा।
वकीलों ने इस समाधान का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फाइलिंग और सुनवाई शेड्यूल में हुई देरी समाप्त होगी। राज्य सरकार ने सिस्टम की अखंडता सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए कड़ी निगरानी रखने का आश्वासन दिया है।
यह कदम भारत के न्यायिक प्रणाली में तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है और विभिन्न सरकारी शाखाओं में डिजिटल उपकरणों के समन्वित कार्यान्वयन की आवश्यकता को उजागर करता है।
विवाद तब उत्पन्न हुआ जब राज्य के आईटी विभाग ने जजों की सहमति के बिना नया ई‑सिग्नेचर प्लेटफ़ॉर्म लागू किया, जिससे कई कोर्ट प्रक्रियाओं में रुकावट आई। हाई कोर्ट और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के बीच हुए वार्तालापों के बाद अब डिजिटल सिग्नेचर शीघ्र जारी करने का समझौता हुआ है।
अधिकारी बताते हैं कि डिजिटल प्रमाणपत्र एक मान्य क्रिप्टोग्राफ़िक सेवा प्रदाता के माध्यम से उत्पन्न किए जाएंगे और भारतीय सरकार के ई‑साइन फ्रेमवर्क के अनुरूप होंगे। इस व्यवस्था से जज आदेश, नोटिस और अन्य न्यायिक दस्तावेज़ इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन कर सकेंगे, जिससे केस प्रबंधन में तेजी आएगी और कागजी कार्य कम होगा।
वकीलों ने इस समाधान का स्वागत किया है, क्योंकि इससे फाइलिंग और सुनवाई शेड्यूल में हुई देरी समाप्त होगी। राज्य सरकार ने सिस्टम की अखंडता सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए कड़ी निगरानी रखने का आश्वासन दिया है।
यह कदम भारत के न्यायिक प्रणाली में तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है और विभिन्न सरकारी शाखाओं में डिजिटल उपकरणों के समन्वित कार्यान्वयन की आवश्यकता को उजागर करता है।