📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Joydeep
शिक्षा
पश्चिम बंगाल ने आईएसकेसीओएन मध्याह्न भोजन योजना को सभी जिलों में विस्तारित किया
✍️ The Avenue Mail
🗓 08 नव. 2026, 01:32 PM
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पश्चिम बंगाल सरकार ने आईएसकेसीओएन द्वारा प्रायोजित मध्याह्न भोजन योजना को राज्य भर के स्कूलों में लागू करने की घोषणा की।
कोलकाता, पश्चिम बंगाल – राज्य सरकार ने घोषणा की कि आईएसकेसीओएन मध्याह्न भोजन योजना, जो पहले कुछ जिलों में सीमित थी, अब पूरे पश्चिम बंगाल के स्कूलों में लागू होगी। यह कदम स्कूल‑उम्र के बच्चों को पोषण समर्थन बढ़ाने और उपस्थिति दर में सुधार करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि योजना का संचालन आईएसकेसीओएन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया जाएगा, जो शाकाहारी भोजन को अपने मानकों के अनुसार तैयार करेगा। अतिरिक्त निधि लॉजिस्टिक्स, रसोई सुविधाओं और निगरानी तंत्र को कवर करने के लिए आवंटित की जाएगी।
रोल‑आउट आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू होगा, जिसमें स्कूल कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। शिक्षा विभाग के स्रोतों के अनुसार, यह पहल राज्य के बाल स्वास्थ्य सुधार के व्यापक लक्ष्य के साथ मेल खाती है।
माता‑पिता और शिक्षकों सहित हितधारकों ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि यह कुपोषण को कम करने और बेहतर सीखने के माहौल प्रदान करने की संभावना रखती है। योजना की प्रभावशीलता को समय‑समय पर ऑडिट और भाग लेने वाले स्कूलों की प्रतिक्रिया के माध्यम से मापा जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि योजना का संचालन आईएसकेसीओएन ट्रस्ट के साथ मिलकर किया जाएगा, जो शाकाहारी भोजन को अपने मानकों के अनुसार तैयार करेगा। अतिरिक्त निधि लॉजिस्टिक्स, रसोई सुविधाओं और निगरानी तंत्र को कवर करने के लिए आवंटित की जाएगी।
रोल‑आउट आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू होगा, जिसमें स्कूल कर्मचारियों और स्वयंसेवकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। शिक्षा विभाग के स्रोतों के अनुसार, यह पहल राज्य के बाल स्वास्थ्य सुधार के व्यापक लक्ष्य के साथ मेल खाती है।
माता‑पिता और शिक्षकों सहित हितधारकों ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि यह कुपोषण को कम करने और बेहतर सीखने के माहौल प्रदान करने की संभावना रखती है। योजना की प्रभावशीलता को समय‑समय पर ऑडिट और भाग लेने वाले स्कूलों की प्रतिक्रिया के माध्यम से मापा जाएगा।