📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Syced
वायरल
अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय राष्ट्रगान गाए जाने का झूठा वीडियो खंडन
✍️ News Mobile
🗓 26 अग. 2026, 05:37 AM
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सोशल मीडिया पर भारतीय राष्ट्रगान के अफ़ग़ानिस्तान में गाए जाने का दावा करने वाला वीडियो असंबंधित फुटेज साबित हुआ, जिससे तथ्य‑जांचकर्ताओं ने गलत सूचना के प्रसार पर चेतावनी दी।
तथ्य‑जाँच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो, जिसमें अफ़ग़ानिस्तान में भारतीय राष्ट्रगान गाए जाने का दावा किया गया था, वास्तव में ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं दिखाता। इस क्लिप को एक अलग कार्यक्रम से जोड़ा गया है, जिसका न तो भारतीय न ही अफ़ग़ानिस्तानी आधिकारिक समारोह से कोई संबंध है।
भ्रामक पोस्ट कई प्लेटफ़ॉर्म पर राष्ट्रीय एकता के भाव के साथ साझा किया गया, पर ऑडियो‑विज़ुअल विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि न तो भारतीय राष्ट्रगान की ध्वनि है और न ही कोई अफ़ग़ानिस्तानी पृष्ठभूमि। दोनों देशों की कोई सरकारी या राजनयिक स्रोत ने अफ़ग़ानिस्तान में इस प्रकार का कोई कार्यक्रम होने की पुष्टि नहीं की है।
विशेषज्ञों ने इस प्रकार की सामग्री को राष्ट्रीय भावनाओं का फायदा उठाकर वायरल करने की आसान प्रक्रिया को उजागर किया और उपयोगकर्ताओं से स्रोत की जाँच करने की अपील की। यह घटना गलत सूचना को रोकने के व्यापक चुनौती को दर्शाती है।
भारत और अफ़ग़ानिस्तान दोनों के अधिकारियों ने इस तरह के किसी भी कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वीडियो एक बनावटी दावा है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को misinformation नीतियों के तहत इस पोस्ट को लेबल या हटाने का अनुरोध किया गया है।
यह मामला जनता को चेतावनी देता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी सनसनीखेज खबरों को साझा करने से पहले विश्वसनीय तथ्य‑जाँच स्रोतों पर भरोसा किया जाए।
भ्रामक पोस्ट कई प्लेटफ़ॉर्म पर राष्ट्रीय एकता के भाव के साथ साझा किया गया, पर ऑडियो‑विज़ुअल विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ कि न तो भारतीय राष्ट्रगान की ध्वनि है और न ही कोई अफ़ग़ानिस्तानी पृष्ठभूमि। दोनों देशों की कोई सरकारी या राजनयिक स्रोत ने अफ़ग़ानिस्तान में इस प्रकार का कोई कार्यक्रम होने की पुष्टि नहीं की है।
विशेषज्ञों ने इस प्रकार की सामग्री को राष्ट्रीय भावनाओं का फायदा उठाकर वायरल करने की आसान प्रक्रिया को उजागर किया और उपयोगकर्ताओं से स्रोत की जाँच करने की अपील की। यह घटना गलत सूचना को रोकने के व्यापक चुनौती को दर्शाती है।
भारत और अफ़ग़ानिस्तान दोनों के अधिकारियों ने इस तरह के किसी भी कार्यक्रम की पुष्टि नहीं की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वीडियो एक बनावटी दावा है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को misinformation नीतियों के तहत इस पोस्ट को लेबल या हटाने का अनुरोध किया गया है।
यह मामला जनता को चेतावनी देता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी सनसनीखेज खबरों को साझा करने से पहले विश्वसनीय तथ्य‑जाँच स्रोतों पर भरोसा किया जाए।