📷 चित्र स्रोत: The Hindu (via NewsData)
मनोरंजन
मप्पिलापट्टू की अमर धुनों और येशुदास के प्रारंभिक कार्यक्रमों के लिए संगीतकार को सम्मानित किया गया
✍️ The Hindu
🗓 02 सित. 2026, 05:43 AM
👁 4
अनाम संगीतकार, जिन्होंने मप्पिलापट्टू की धुनों में योगदान दिया, मलयालम संगीत के दिग्गज एम.एस. बाबुराज के साथ काम किया और कोझिकोड में के.जे. येशुदास के पहले प्रदर्शन में उनके साथ रहे।
मप्पिलापट्टू केरल की एक पारंपरिक मुस्लिम भक्ति संगीत शैली है, जिसे कई पीछे के कलाकारों ने जीवित रखा है। रिपोर्ट में नाम नहीं बताए गए एक ऐसा संगीतकार है, जिसे शैली की कुछ अमर धुनों को आकार देने का श्रेय दिया जाता है।
उन्होंने एम.एस. बाबुराज के साथ निकटता से काम किया, जो 1950 और 60 के दशक में मलयालम फिल्म संगीत में क्रांति लाने वाले प्रसिद्ध संगीतकार थे। उनके सहयोग ने मप्पिलापट्टू में एक नई संवेदनशीलता लाई, क्लासिकल सूक्ष्मताओं को शैली की भक्ति भावना के साथ मिलाया।
स्टूडियो कार्य के अलावा, संगीतकार ने युवा के.जे. येशुदास का साथ दिया जब प्रसिद्ध गायक ने कोझिकोड में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया। वह प्रारंभिक संबंध येशुदास के शानदार करियर के एक उल्लेखनीय मील पत्थर के रूप में याद किया जाता है।
हालांकि वह चमक‑धूम से दूर रहे, उनकी योगदान मप्पिलापट्टू के संगीत संग्रह में अभी भी गूंजती रहती है, जो समकालीन श्रोताओं और आने वाले कलाकारों को केरल के मुस्लिम समुदाय की संगीत विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने एम.एस. बाबुराज के साथ निकटता से काम किया, जो 1950 और 60 के दशक में मलयालम फिल्म संगीत में क्रांति लाने वाले प्रसिद्ध संगीतकार थे। उनके सहयोग ने मप्पिलापट्टू में एक नई संवेदनशीलता लाई, क्लासिकल सूक्ष्मताओं को शैली की भक्ति भावना के साथ मिलाया।
स्टूडियो कार्य के अलावा, संगीतकार ने युवा के.जे. येशुदास का साथ दिया जब प्रसिद्ध गायक ने कोझिकोड में अपना पहला सार्वजनिक प्रदर्शन दिया। वह प्रारंभिक संबंध येशुदास के शानदार करियर के एक उल्लेखनीय मील पत्थर के रूप में याद किया जाता है।
हालांकि वह चमक‑धूम से दूर रहे, उनकी योगदान मप्पिलापट्टू के संगीत संग्रह में अभी भी गूंजती रहती है, जो समकालीन श्रोताओं और आने वाले कलाकारों को केरल के मुस्लिम समुदाय की संगीत विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रेरित करती है।