विद्यालय खुला, लेकिन पढ़ने नहीं पहुंचे बच्चे; कनैला में वैकल्पिक व्यवस्था पर भी सवाल।
बिजली के खंभे में पाइप जोड़कर तारों को ऊपर उठाया गया, प्रभावित परिवारों तक अब तक नहीं पहुंची कोई सहायता।
गड़वार (बलिया)।
स्थानीय क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कनैला में बुधवार को विद्यालय तो खुला, लेकिन पढ़ाई के लिए एक भी बच्चा नहीं पहुंचा। विद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। विद्यालय खुलने के बावजूद बच्चों की अनुपस्थिति ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि गांव में बिजली के खंभे से संबंधित समस्या के चलते पाइप जोड़कर बिजली के तारों को ऊपर उठाया गया है। वहीं, प्रभावित परिवारों का कहना है कि अभी तक उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक या अन्य सहायता नहीं मिली है। इतना ही नहीं, उनकी स्थिति जानने के लिए अब तक कोई संबंधित अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा है।इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी (एसडीआई) गड़वार विशाल यादव ने बताया कि विद्यालय संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, ताकि पठन-पाठन का कार्य प्रभावित न हो। हालांकि, विद्यालय खुलने के बावजूद एक भी बच्चे का नहीं पहुंचना इस व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान तथा बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
स्थानीय क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय कनैला में बुधवार को विद्यालय तो खुला, लेकिन पढ़ाई के लिए एक भी बच्चा नहीं पहुंचा। विद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। विद्यालय खुलने के बावजूद बच्चों की अनुपस्थिति ने क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि गांव में बिजली के खंभे से संबंधित समस्या के चलते पाइप जोड़कर बिजली के तारों को ऊपर उठाया गया है। वहीं, प्रभावित परिवारों का कहना है कि अभी तक उन्हें किसी प्रकार की आर्थिक या अन्य सहायता नहीं मिली है। इतना ही नहीं, उनकी स्थिति जानने के लिए अब तक कोई संबंधित अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचा है।इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी (एसडीआई) गड़वार विशाल यादव ने बताया कि विद्यालय संचालन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, ताकि पठन-पाठन का कार्य प्रभावित न हो। हालांकि, विद्यालय खुलने के बावजूद एक भी बच्चे का नहीं पहुंचना इस व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान तथा बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।