धर्म
वाराणसी में काले हनुमान जी का दुर्लभ दर्शन, साल में केवल एक दिन खुला मंदिर का पट
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वाराणसी के रामनगर किले में काले हनुमान जी का दरबार आज सभी भक्तों के लिये खुला है, यह वर्ष में केवल एक ही दिन होता है।
वाराणसी के रामनगर किले में काले हनुमान जी का दरबार आज सभी भक्तों के लिये खुला है। यह वह विशेष दिन है जब वर्ष में 364 दिन बंद रहने वाला मंदिर का पट आज खुला है।
किले की खुदाई में त्रेता युग की दक्षिणमुखी हनुमान जी की भव्य प्रतिमा मिली थी, जिसे काशीराज परिवार ने किले के दक्षिणी छोर पर मंदिर बनाकर स्थापित कराया।
कथा के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम ने समुद्र द्वारा रास्ता न मिलने पर क्रोधित होकर धनुष पर बाण चढ़ाया, तो समुद्र ने क्षमा मांगी। बाण को वापस नहीं लिया जा सकता था, इसलिए प्रभु ने उसे पश्चिम दिशा में छोड़ दिया। बाण की शक्ति से धरती हिल सकती थी, इसलिए हनुमान जी घुटनों के बल बैठ गए और बाण के तेज से उनका विग्रह काला पड़ गया। ऐसी अलौकिक प्रतिमा विश्व में कहीं और नहीं पायी जाती।
रामनगर में राज्याभिषेक के समय स्वयं प्रभु श्रीराम आते हैं, इसलिए साल में केवल इस एक दिन मंदिर का पट खुलता है। भोर की आरती के बाद ही पट खोला जाता है और भक्तों को दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलता है।
किले की खुदाई में त्रेता युग की दक्षिणमुखी हनुमान जी की भव्य प्रतिमा मिली थी, जिसे काशीराज परिवार ने किले के दक्षिणी छोर पर मंदिर बनाकर स्थापित कराया।
कथा के अनुसार, जब प्रभु श्रीराम ने समुद्र द्वारा रास्ता न मिलने पर क्रोधित होकर धनुष पर बाण चढ़ाया, तो समुद्र ने क्षमा मांगी। बाण को वापस नहीं लिया जा सकता था, इसलिए प्रभु ने उसे पश्चिम दिशा में छोड़ दिया। बाण की शक्ति से धरती हिल सकती थी, इसलिए हनुमान जी घुटनों के बल बैठ गए और बाण के तेज से उनका विग्रह काला पड़ गया। ऐसी अलौकिक प्रतिमा विश्व में कहीं और नहीं पायी जाती।
रामनगर में राज्याभिषेक के समय स्वयं प्रभु श्रीराम आते हैं, इसलिए साल में केवल इस एक दिन मंदिर का पट खुलता है। भोर की आरती के बाद ही पट खोला जाता है और भक्तों को दुर्लभ दर्शन का अवसर मिलता है।