स्थानीय
वाराणसी एयर शो को लेकर काशी की दीवारों पर उकेरी जा रही गंगा की लहरें और घाटों के दृश्य
वाराणसी में प्रस्तावित एयर शो के मद्देनजर शहर के सौंदर्यीकरण के कार्य तेज कर दिए गए हैं। लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नमो घाट तक के मार्गों पर म्यूरल आर्ट और आकर्षक लाइटिंग से काशी की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया जा रहा है।
वाराणसी में प्रस्तावित एयर शो के मद्देनजर काशी को आकर्षक रूप देने के लिए शहर का व्यापक सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से नमो घाट तक प्रमुख मार्गों, भवनों, फ्लाईओवर, अंडरपास और दीवारों को सजाने-संवारने का काम तेजी से चल रहा है। कहीं दीवारों पर गंगा की लहरें और घाटों के दृश्य उकेरे जा रहे हैं, तो कहीं भवनों पर सुबहे बनारस की झलक दिखाई देने की तैयारी है। स्ट्रीट लाइट, पेड़ों और पुलों पर आकर्षक रोशनी की व्यवस्था भी की जा रही है, ताकि एयर शो के दौरान शहर पहुंचने वाले लोगों और विदेशी मेहमानों को काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं की झलक मिल सके।
वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि काशी की पहचान उसकी समृद्ध विरासत, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता से है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर को सजाया जा रहा है। एयरपोर्ट से नमो घाट तक के मार्गों पर पेंटिंग, म्यूरल आर्ट और आकर्षक लाइटिंग के माध्यम से काशी की सांस्कृतिक पहचान को उभारने का काम किया जा रहा है। दीवारों पर गंगा की लहरों, घाटों और गंगा तट के दृश्यों को उकेरा जा रहा है, जबकि मार्गों पर गंगा आरती के दृश्य और काशी की कला-संस्कृति से जुड़े चित्र भी देखने को मिलेंगे।
नमो घाट मार्ग के डिवाइडर पर काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप झंडे लगाए जाने हैं, जिन पर भगवान शिव के डमरू, त्रिशूल और ॐ के प्रतीक होंगे। इसके अलावा, चौकाघाट से नमो घाट तक दुकानों और भवनों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में रंगने का काम कराया जा रहा है। पेड़ों पर फसाड लाइटिंग और बिजली के खंभों पर स्पाइरल स्ट्रीट लाइट लगाई जा रही है, जिससे मार्गों का दृश्य अधिक व्यवस्थित और आकर्षक नजर आएगा। सजावट का हिस्सा बनने वाले अन्य तत्वों में भगवान बुद्ध से जुड़े प्रसंगों के साथ काशी के गीत-संगीत और नृत्य की झलक भी शामिल है।
बाबतपुर एयरपोर्ट से अतुलानंद तक मोटिफ लाइटिंग स्थापित करने और बिजली के खंभों पर स्ट्रिप लाइट लगाने का काम किया जा रहा है। बाबतपुर से बाबतपुर फ्लाईओवर तक डिवाइडर पर पेंटिंग कराई जा रही है, जबकि बाबतपुर से नमो घाट ब्रिज तक पेड़ों और पुल पर फसाड लाइटिंग लगाने का काम भी चल रहा है। नमो घाट से चौकाघाट तक सड़क किनारे स्थित भवनों पर फसाड पेंटिंग कराई जा रही है और चौकाघाट पुल पर मोटिफ स्तंभ लगाए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट से नमो घाट तक का मार्ग रोशनी और रंगों से सजा नजर आएगा, जिसका उद्देश्य शहर आने वाले लोगों को काशी की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।
वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पुर्ण बोरा ने बताया कि काशी की पहचान उसकी समृद्ध विरासत, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता से है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर को सजाया जा रहा है। एयरपोर्ट से नमो घाट तक के मार्गों पर पेंटिंग, म्यूरल आर्ट और आकर्षक लाइटिंग के माध्यम से काशी की सांस्कृतिक पहचान को उभारने का काम किया जा रहा है। दीवारों पर गंगा की लहरों, घाटों और गंगा तट के दृश्यों को उकेरा जा रहा है, जबकि मार्गों पर गंगा आरती के दृश्य और काशी की कला-संस्कृति से जुड़े चित्र भी देखने को मिलेंगे।
नमो घाट मार्ग के डिवाइडर पर काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप झंडे लगाए जाने हैं, जिन पर भगवान शिव के डमरू, त्रिशूल और ॐ के प्रतीक होंगे। इसके अलावा, चौकाघाट से नमो घाट तक दुकानों और भवनों को एकरूपता देने के लिए एक ही रंग में रंगने का काम कराया जा रहा है। पेड़ों पर फसाड लाइटिंग और बिजली के खंभों पर स्पाइरल स्ट्रीट लाइट लगाई जा रही है, जिससे मार्गों का दृश्य अधिक व्यवस्थित और आकर्षक नजर आएगा। सजावट का हिस्सा बनने वाले अन्य तत्वों में भगवान बुद्ध से जुड़े प्रसंगों के साथ काशी के गीत-संगीत और नृत्य की झलक भी शामिल है।
बाबतपुर एयरपोर्ट से अतुलानंद तक मोटिफ लाइटिंग स्थापित करने और बिजली के खंभों पर स्ट्रिप लाइट लगाने का काम किया जा रहा है। बाबतपुर से बाबतपुर फ्लाईओवर तक डिवाइडर पर पेंटिंग कराई जा रही है, जबकि बाबतपुर से नमो घाट ब्रिज तक पेड़ों और पुल पर फसाड लाइटिंग लगाने का काम भी चल रहा है। नमो घाट से चौकाघाट तक सड़क किनारे स्थित भवनों पर फसाड पेंटिंग कराई जा रही है और चौकाघाट पुल पर मोटिफ स्तंभ लगाए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के पूरा होने के बाद एयरपोर्ट से नमो घाट तक का मार्ग रोशनी और रंगों से सजा नजर आएगा, जिसका उद्देश्य शहर आने वाले लोगों को काशी की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है।