📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ramwik
मौसम
नेपाल‑तिब्बत आपदाओं के बाद उत्तराखंड के 13 जोखिमपूर्ण ग्लेशियल झीलों पर बढ़ा ध्यान
✍️ India Today
🗓 30 अग. 2026, 01:36 AM
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नेपाल और तिब्बत में हालिया बाढ़‑भूस्खलन ने उत्तराखंड के 13 जोखिमपूर्ण ग्लेशियल झीलों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे भारतीय अधिकारियों ने निगरानी बढ़ा दी है।
नेपाल और तिब्बत में हालिया बाढ़‑भूस्खलन, जिसमें ग्लेशियल झीलों का फट जाना शामिल है, ने भारतीय हिमालय में समान जोखिमों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये घटनाएँ उत्तराखंड के 13 जोखिमपूर्ण ग्लेशियल झीलों के लिए चेतावनी हैं।
इन झीलों का स्थान चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में है, जहाँ से प्रमुख नदियों का स्रोत बनती हैं जो नीचे बसे गाँवों को जल प्रदान करती हैं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विस्तृत मूल्यांकन शुरू कर दिया है और जल स्तर की निगरानी के लिए रिमोट‑सेंसिंग उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के तेज़ पिघलने से झीलों का आयतन बढ़ रहा है और मोरैना बांध अस्थिर हो रहे हैं, जिससे फटने का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए अधिकारियों ने शीघ्र चेतावनी प्रणाली और नियंत्रित जल निकासी जैसे इंजीनियरिंग उपायों की योजना बनाई है।
अभी कोई तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, परंतु राज्य ने नीचे बसे घाटियों के निवासियों को सतर्क रहने और आपदा‑प्रतिक्रिया अभ्यास में भाग लेने की सलाह दी है। उत्तराखंड की ग्लेशियल झीलों पर यह फोकस हिमालय में समान आपदाओं को रोकने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
इन झीलों का स्थान चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में है, जहाँ से प्रमुख नदियों का स्रोत बनती हैं जो नीचे बसे गाँवों को जल प्रदान करती हैं। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विस्तृत मूल्यांकन शुरू कर दिया है और जल स्तर की निगरानी के लिए रिमोट‑सेंसिंग उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के तेज़ पिघलने से झीलों का आयतन बढ़ रहा है और मोरैना बांध अस्थिर हो रहे हैं, जिससे फटने का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए अधिकारियों ने शीघ्र चेतावनी प्रणाली और नियंत्रित जल निकासी जैसे इंजीनियरिंग उपायों की योजना बनाई है।
अभी कोई तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, परंतु राज्य ने नीचे बसे घाटियों के निवासियों को सतर्क रहने और आपदा‑प्रतिक्रिया अभ्यास में भाग लेने की सलाह दी है। उत्तराखंड की ग्लेशियल झीलों पर यह फोकस हिमालय में समान आपदाओं को रोकने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।