📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Schwiki
विज्ञान
उत्तarakhand में चमोली में पहला ग्लेशियल लेक चेतावनी सिस्टम स्थापित
✍️ The New Indian Express
🗓 30 सित. 2026, 01:17 AM
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उत्तarakhand सरकार ने चमोली जिले में अपना पहला ग्लेशियल लेक चेतावनी सिस्टम स्थापित करने की योजना की घोषणा की है।
उत्तarakhand सरकार ने घोषणा की है कि चमोली जिले में ग्लेशियल लेक प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली स्थापित की जाएगी, जो राज्य का पहला ऐसा कदम है। यह प्रणाली ऊँचे पहाड़ी झीलों की निगरानी करेगी, जो अचानक बाढ़ (ग्लेशियल लेक आउटब्रस्ट फ्लड) का खतरा उत्पन्न कर सकती हैं, और नीचे बसी बस्तियों को समय पर सतर्क करेगी।
स्थापना कार्य में वास्तविक‑समय सेंसर और संचार नेटवर्क शामिल होगा, जिससे प्राधिकरण और स्थानीय लोगों को तुरंत सूचना मिल सके। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के पिघलने की बढ़ती चिंता के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है, जिसका उद्देश्य संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करना है।
परियोजना का प्रबंधन राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग करेंगे, जो वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर डेटा का विश्लेषण करेंगे। सटीक समय‑सीमा अभी नहीं बताई गई, पर सरकार ने कहा है कि यह प्रणाली मानसून से पहले चालू हो जाएगी, ताकि अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय समुदाय ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि प्रारम्भिक चेतावनी से अलकनंदा और भागीरथी नदियों के किनारे बसे गांवों में जीवन और संपत्ति की रक्षा संभव होगी। यह परियोजना पहाड़ी क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों के साथ भी मेल खाती है।
स्थापना कार्य में वास्तविक‑समय सेंसर और संचार नेटवर्क शामिल होगा, जिससे प्राधिकरण और स्थानीय लोगों को तुरंत सूचना मिल सके। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमनदों के पिघलने की बढ़ती चिंता के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है, जिसका उद्देश्य संभावित आपदाओं के प्रभाव को कम करना है।
परियोजना का प्रबंधन राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग और जल संसाधन विभाग करेंगे, जो वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर डेटा का विश्लेषण करेंगे। सटीक समय‑सीमा अभी नहीं बताई गई, पर सरकार ने कहा है कि यह प्रणाली मानसून से पहले चालू हो जाएगी, ताकि अधिकतम सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
स्थानीय समुदाय ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि प्रारम्भिक चेतावनी से अलकनंदा और भागीरथी नदियों के किनारे बसे गांवों में जीवन और संपत्ति की रक्षा संभव होगी। यह परियोजना पहाड़ी क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयासों के साथ भी मेल खाती है।