📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: Harshit SR
Derivative work: Unpetitpro
टेक्नोलॉजी
उत्तarakhand के आविष्कारक ने 13 साल के स्व-अध्ययन से बनाई उड़न कार
✍️ India Today
🗓 23 अक्टू. 2026, 07:38 PM
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उत्तarakhand के एक स्व‑शिक्षित आविष्कारक ने, जिसने कभी इंजीनियरिंग डिग्री नहीं ली, 13 साल की कोशिशों के बाद उड़न कार का प्रोटोटाइप तैयार किया।
उत्तarakhand के एक निवासी, जिनके पास कोई औपचारिक इंजीनियरिंग डिग्री नहीं है, ने लगभग तेरह साल के व्यक्तिगत शोध और प्रयोग के बाद एक प्रोटोटाइप उड़न कार को सफलतापूर्वक तैयार किया, यह घोषणा की। आविष्कारक ने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन बताया कि उन्होंने एयरोडायनामिक्स और प्रोपल्शन सिस्टम को स्वयं ऑनलाइन कोर्स, कार्यशालाओं और प्रयोग‑त्रुटि के माध्यम से सीखते हुए विकसित किया।
तैयार वाहन हल्के कंपोजिट सामग्री और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक‑प्रोपल्शन सिस्टम को मिलाकर बना है, जिससे यह जमीन पर चलने और हवा में उठने दोनों मोड में काम कर सकता है। निजी हवाई पट्टी पर प्रारंभिक ग्राउंड टेस्ट किए गए और नियंत्रित परिस्थितियों में कम ऊँचाई पर एक छोटा उड़ान परीक्षण किया गया।
हालांकि यह प्रोटोटाइप अभी व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रमाणित नहीं है, लेकिन इस उपलब्धि ने स्थानीय तकनीकी उत्साही और कुछ स्टार्ट‑अप इन्क्यूबेटर का ध्यान आकर्षित किया है, जो आगे के विकास में रुचि रखते हैं। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा और स्केलेबिलिटी के मूल्यांकन के लिए डिजाइन की जाँच करने की इच्छा जताई, साथ ही भविष्य की गतिशीलता समाधान में संभावित प्रभाव को भी माना।
आविष्कारक ने कहा कि यह परियोजना शुद्ध जिज्ञासा और व्यक्तिगत परिवहन की सीमाओं को आगे बढ़ाने की इच्छा से प्रेरित थी, न कि व्यावसायिक लाभ से। वह आशा करते हैं कि यह उड़न कार भारत के अन्य स्व‑शिक्षित युवाओं को औपचारिक प्रमाणपत्रों के अभाव में भी बड़े इंजीनियरिंग लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।
तैयार वाहन हल्के कंपोजिट सामग्री और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक‑प्रोपल्शन सिस्टम को मिलाकर बना है, जिससे यह जमीन पर चलने और हवा में उठने दोनों मोड में काम कर सकता है। निजी हवाई पट्टी पर प्रारंभिक ग्राउंड टेस्ट किए गए और नियंत्रित परिस्थितियों में कम ऊँचाई पर एक छोटा उड़ान परीक्षण किया गया।
हालांकि यह प्रोटोटाइप अभी व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रमाणित नहीं है, लेकिन इस उपलब्धि ने स्थानीय तकनीकी उत्साही और कुछ स्टार्ट‑अप इन्क्यूबेटर का ध्यान आकर्षित किया है, जो आगे के विकास में रुचि रखते हैं। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने सुरक्षा और स्केलेबिलिटी के मूल्यांकन के लिए डिजाइन की जाँच करने की इच्छा जताई, साथ ही भविष्य की गतिशीलता समाधान में संभावित प्रभाव को भी माना।
आविष्कारक ने कहा कि यह परियोजना शुद्ध जिज्ञासा और व्यक्तिगत परिवहन की सीमाओं को आगे बढ़ाने की इच्छा से प्रेरित थी, न कि व्यावसायिक लाभ से। वह आशा करते हैं कि यह उड़न कार भारत के अन्य स्व‑शिक्षित युवाओं को औपचारिक प्रमाणपत्रों के अभाव में भी बड़े इंजीनियरिंग लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।