📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harshit.S.R
अपराध
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने मंत्री रेखा आर्य के पति की FIR रद्द करने की याचिका खारिज की
✍️ Hindustan Times
🗓 04 नव. 2026, 05:33 PM
👁 17
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने भाजपा मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा दायर FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे मामला बरकरार रहा।
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने मंगलवार को राज्य मंत्री रेखा आर्य के पति द्वारा दायर FIR रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में FIR को निराधार बताया गया था, पर कोर्ट ने इसे अस्वीकार कर जांच जारी रखने का आदेश दिया।
यह FIR स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई थी, जिसमें मंत्री पर कुछ अनियमितता का आरोप लगाया गया है। यद्यपि आरोपों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, कोर्ट का फैसला यह दर्शाता है कि केवल रिश्ते के आधार पर कानूनी प्रक्रिया को रोक नहीं सकते।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट का यह निर्णय जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है और यह संकेत देता है कि राजनीतिक संबंध स्वचालित रूप से किसी को जांच से बचा नहीं सकते। अब मामला सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, अगली सुनवाई इस महीने के अंत में निर्धारित है।
रेखा आर्य, जो [पोर्टफोलियो का उल्लेख नहीं] संभालती हैं, ने कोर्ट के आदेश पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। यह फैसला विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों का ध्यान आकर्षित करेगा, जो राज्य शासन में जवाबदेही की निगरानी कर रहे हैं।
यह मामला उत्तarakhand न्यायिक प्रणाली के अधिकार क्षेत्र में रहेगा, और आगे की कोई अपील भारतीय कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।
यह FIR स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज की गई थी, जिसमें मंत्री पर कुछ अनियमितता का आरोप लगाया गया है। यद्यपि आरोपों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया, कोर्ट का फैसला यह दर्शाता है कि केवल रिश्ते के आधार पर कानूनी प्रक्रिया को रोक नहीं सकते।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हाई कोर्ट का यह निर्णय जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है और यह संकेत देता है कि राजनीतिक संबंध स्वचालित रूप से किसी को जांच से बचा नहीं सकते। अब मामला सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा, अगली सुनवाई इस महीने के अंत में निर्धारित है।
रेखा आर्य, जो [पोर्टफोलियो का उल्लेख नहीं] संभालती हैं, ने कोर्ट के आदेश पर अभी तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। यह फैसला विपक्षी दलों और नागरिक समाज के समूहों का ध्यान आकर्षित करेगा, जो राज्य शासन में जवाबदेही की निगरानी कर रहे हैं।
यह मामला उत्तarakhand न्यायिक प्रणाली के अधिकार क्षेत्र में रहेगा, और आगे की कोई अपील भारतीय कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है।