📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harshit.S.R
देश
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने वयस्क महिला के साथी चुनने के संवैधानिक अधिकार की पुष्टि की
✍️ The Indian Express
🗓 25 अग. 2026, 07:03 PM
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उत्तarakhand हाई कोर्ट ने कहा कि वयस्क महिला का साथी चुनने का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता के तहत संवैधानिक रूप से संरक्षित है।
उत्तarakhand हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि वयस्क महिला को अपने जीवनसाथी का चयन करने का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में मान्य किया।
न्यायालय ने यह कहा कि महिला की पसंद पर कोई भी प्रतिबंध तभी वैध हो सकता है जब वह राज्य के किसी ठोस हित को सिद्ध करे, जो इस मामले में नहीं दिखा। इस कारण, जबरन विवाह को चुनौती देने वाले याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे व्यक्तिगत स्वायत्तता का सिद्धांत मजबूत हुआ।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के व्यक्तिगत स्वतंत्रता संबंधी निर्णयों के साथ संगत है और देश भर में समान विवादों पर प्रभाव डाल सकता है। यह रुख सामाजिक या पारिवारिक दबावों के बावजूद मौलिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।
न्यायालय ने यह कहा कि महिला की पसंद पर कोई भी प्रतिबंध तभी वैध हो सकता है जब वह राज्य के किसी ठोस हित को सिद्ध करे, जो इस मामले में नहीं दिखा। इस कारण, जबरन विवाह को चुनौती देने वाले याचिका को खारिज कर दिया गया, जिससे व्यक्तिगत स्वायत्तता का सिद्धांत मजबूत हुआ।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के व्यक्तिगत स्वतंत्रता संबंधी निर्णयों के साथ संगत है और देश भर में समान विवादों पर प्रभाव डाल सकता है। यह रुख सामाजिक या पारिवारिक दबावों के बावजूद मौलिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को रेखांकित करता है।