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25 अक्टू. 2026•
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अपराध

उत्तर प्रदेश में हत्या के एक मामले में सजा से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी

✍️ रिपोर्टर: Ajaruddin 🗓 25 अक्टू. 2026, 09:44 PM 👁 15
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मामले की पृष्ठभूमि साल 2016 में हुई योगेश सिंह की हत्या से जुड़ी है। शिकायतकर्ता अविनाश सिंह के अनुसार, उनके चाचा योगेश सिंह ईंट-भट्ठे के मालिक थे और राजू ने उनसे उधार पैसे

उत्तर प्रदेश में हत्या के एक मामले में सजा से बचने के लिए खुद को मृत घोषित करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी राजू उर्फ राजकुमार पर साल 2016 में रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से चिता पर लेटे हुए अपनी तस्वीर तैयार कराई और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर खुद को मृत साबित करने की कोशिश की। वह कई महीनों से पुलिस को चकमा दे रहा था।

पुलिस अधीक्षक सर्वेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर रविवार तड़के शहर कोतवाली, एसओजी और सर्विलांस टीम अपराधियों की तलाश में चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि हत्या के मामले में फरार आरोपी राजू उर्फ राजकुमार ख्वाजाजहांपुर इलाके में आया हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर खुद को मृत घोषित करने की साजिश का खुलासा किया।

पुलिस के अनुसार, हत्या के मामले में अदालत में सुनवाई चल रही थी और गवाहों के बयान दर्ज हो चुके थे। सजा से बचने के लिए आरोपी ने अपनी मौत का फर्जी प्रमाण तैयार कराने की योजना बनाई। पुलिस का दावा है कि 30 मई 2025 को वह गाजीपुर के एक श्मशान घाट पहुंचा और अंतिम संस्कार के लिए तैयार चिता पर लेटकर अपनी तस्वीर खिंचवाई। इसके बाद AI की मदद से अंतिम संस्कार जैसी दिखने वाली तस्वीर तैयार कराई और कथित तौर पर उसी के आधार पर अपना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया।

बताया जा रहा है कि आरोपी के परिजनों ने मृत्यु प्रमाण पत्र और तस्वीर अदालत में पेश कर उसकी मौत साबित करने की कोशिश की थी। हालांकि, दस्तावेजों को लेकर संदेह होने पर पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके बाद आरोपी की तलाश तेज कर दी गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी ने हत्या के मुकदमे में सजा से बचने के साथ-साथ शेयर बाजार में निवेश के नाम पर लोगों से लिए गए पैसे हड़पने के इरादे से भी यह साजिश रची थी।

पुलिस के मुताबिक, राजू पहले मुंबई में एक निजी कंपनी में काम करता था। बाद में वह शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने लगा। इस दौरान उसने कई डॉक्टरों समेत अन्य लोगों से लाखों रुपये निवेश कराए थे। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि निवेश के नाम पर कितनी रकम जुटाई गई और क्या इस मामले में अन्य लोग भी प्रभावित हुए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि साल 2016 में हुई योगेश सिंह की हत्या से जुड़ी है। शिकायतकर्ता अविनाश सिंह के अनुसार, उनके चाचा योगेश सिंह ईंट-भट्ठे के मालिक थे और राजू ने उनसे उधार पैसे लिए थे। आरोप है कि इसी रकम को लेकर हुए विवाद के बाद राजू ने अपने दोस्त सुदर्शन के साथ मिलकर मुंशीपुरा रेलवे लाइन के पास योगेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

शहर कोतवाल प्रमेन्द्र सिंह के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनसे जुड़े अपराधों के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराने के पूरे मामले की जांच जारी है
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