📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
बिज़नेस
USIBC अध्यक्ष ने यूएस‑इंडिया के ऐतिहासिक व्यापार समझौते को तेज करने और टैरिफ घटाने की अपील की
✍️ The Economic Times
🗓 26 सित. 2026, 07:16 AM
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US-India Business Council के अध्यक्ष अतुल ने दोनों देशों से ऐतिहासिक व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने और टैरिफ घटाने की मांग की।
वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच चल रहे व्यापक व्यापार समझौते को US-India Business Council (USIBC) के अध्यक्ष अतुल ने ऐतिहासिक कहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को वार्ता को तेज करना चाहिए ताकि टैरिफ में कटौती के साथ यह समझौता शीघ्र पूरा हो सके, जिससे निर्यातकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।
अतुल ने बताया कि इस समझौते में कृषि, विनिर्माण, सेवाएँ और डिजिटल व्यापार जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। टैरिफ कम करने से भारतीय वस्तुओं को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुँच मिलेगी और अमेरिकी कंपनियों को भारत के बढ़ते उपभोक्ता बाजार में नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि वार्ता में देरी से अब तक बनी गति खो सकती है, विशेषकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच। अतुल ने नीति निर्माताओं से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने और USIBC की उद्योग‑विशिष्ट अंतर्दृष्टि का उपयोग करके समझौते को व्यावहारिक आर्थिक लाभ देने की अपील की।
हालांकि अभी कोई निश्चित समय‑सीमा नहीं बताई गई है, परिषद का मानना है कि दोनों सरकारों के सामूहिक प्रयास से अगले वित्तीय वर्ष के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है, जिससे आर्थिक एकीकरण को नई दिशा मिलेगी।
अतुल ने बताया कि इस समझौते में कृषि, विनिर्माण, सेवाएँ और डिजिटल व्यापार जैसे कई क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। टैरिफ कम करने से भारतीय वस्तुओं को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुँच मिलेगी और अमेरिकी कंपनियों को भारत के बढ़ते उपभोक्ता बाजार में नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने चेतावनी दी कि वार्ता में देरी से अब तक बनी गति खो सकती है, विशेषकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के बीच। अतुल ने नीति निर्माताओं से इस मुद्दे को प्राथमिकता देने और USIBC की उद्योग‑विशिष्ट अंतर्दृष्टि का उपयोग करके समझौते को व्यावहारिक आर्थिक लाभ देने की अपील की।
हालांकि अभी कोई निश्चित समय‑सीमा नहीं बताई गई है, परिषद का मानना है कि दोनों सरकारों के सामूहिक प्रयास से अगले वित्तीय वर्ष के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है, जिससे आर्थिक एकीकरण को नई दिशा मिलेगी।