📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / U.S. Air Force photo by Senior Airman Sabrina Full
रक्षा
जोधपुर एयर बेस पर ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास में अमेरिकी F-35 सहित 7 देशों के विमानों की भागीदारी
✍️ Amar Ujala · Jodhpur
🗓 23 सित. 2026, 05:15 PM
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भारतीय वायुसेना 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर में ‘तरंग शक्ति’ के दूसरे संस्करण का आयोजन करेगी, जिसमें अमेरिकी F‑35 और सात देशों के विमान शामिल होंगे।
जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक ‘तरंग शक्ति’ के दूसरे चरण का आयोजन होगा। यह बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास भारतीय वायुसेना और भागीदार देशों के बीच अंतर-संचालन और सामरिक तालमेल को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।
इस अभ्यास में संयुक्त राज्य अमेरिका अपना पाँचवीं पीढ़ी का F‑35 लड़ाकू विमान उतारेगा, साथ ही छह अन्य देशों के विमानों की भागीदारी होगी। विदेशी वायुसेनाओं की सटीक सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, परन्तु अमेरिका की भागीदारी को प्रमुख मानते हुए इस अभ्यास की रणनीतिक महत्ता पर बल दिया गया है।
‘तरंग शक्ति’ में पायलट और ग्राउंड क्रू संयुक्त मिशन, वायु‑से‑वायु तथा वायु‑से‑भू‑लक्ष्य अभ्यास, और आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान‑प्रदान करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेल्थ F‑35 का समावेश इस ड्रिल की तकनीकी जटिलता और वास्तविकता को काफी बढ़ाएगा।
जोधपुर, जो ऐतिहासिक रूप से अग्रिम मोर्चे पर स्थित एक प्रमुख हवाई अड्डा है, इस अभ्यास की मेजबानी करके भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भूमिका को सुदृढ़ करता है और उन्नत प्लेटफ़ॉर्म को सहयोगी बलों के साथ एकीकृत करने की अपनी क्षमता को प्रदर्शित करता है।
इस अभ्यास में संयुक्त राज्य अमेरिका अपना पाँचवीं पीढ़ी का F‑35 लड़ाकू विमान उतारेगा, साथ ही छह अन्य देशों के विमानों की भागीदारी होगी। विदेशी वायुसेनाओं की सटीक सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, परन्तु अमेरिका की भागीदारी को प्रमुख मानते हुए इस अभ्यास की रणनीतिक महत्ता पर बल दिया गया है।
‘तरंग शक्ति’ में पायलट और ग्राउंड क्रू संयुक्त मिशन, वायु‑से‑वायु तथा वायु‑से‑भू‑लक्ष्य अभ्यास, और आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान‑प्रदान करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेल्थ F‑35 का समावेश इस ड्रिल की तकनीकी जटिलता और वास्तविकता को काफी बढ़ाएगा।
जोधपुर, जो ऐतिहासिक रूप से अग्रिम मोर्चे पर स्थित एक प्रमुख हवाई अड्डा है, इस अभ्यास की मेजबानी करके भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भूमिका को सुदृढ़ करता है और उन्नत प्लेटफ़ॉर्म को सहयोगी बलों के साथ एकीकृत करने की अपनी क्षमता को प्रदर्शित करता है।