📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prof Ranga Sai
टेक्नोलॉजी
अनम्यूट भारत: प्रोफेसर अभय करंदीकर ने बताया भारत का अगला टेक विज़न
✍️ Amar Ujala
🗓 12 अग. 2026, 09:40 AM
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अनम्यूट भारत के विशेष एपिसोड में पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर ने भारत को वैश्विक टेक नेता बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये की योजना प्रस्तुत की।
टॉक शो "अनम्यूट भारत" के विशेष एपिसोड में नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य और पूर्व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर को अतिथि के रूप में बुलाया गया।
साक्षात्कार के दौरान प्रोफेसर करंदीकर ने 1 लाख करोड़ रुपये के व्यापक रणनीति का विवरण दिया, जिसका उद्देश्य भारत के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को तेज करना है। यह योजना अनुसंधान व विकास, प्रतिभा संवर्धन और बुनियादी ढाँचे के उन्नयन पर केंद्रित है।
होस्ट ने इस पहल को अकादमी, उद्योग और सरकार के बीच सेतु बनाने के रूप में रेखांकित किया, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा मिले।
करंदीकर ने सतत निवेश और नीति समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया, यह बताते हुए कि प्रस्तावित बजट अगले दशक में चरणबद्ध रूप से आवंटित किया जाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
इस एपिसोड ने नीति निर्माताओं, उद्योग के नेताओं और आम जनता से व्यापक ध्यान आकर्षित किया, जो इस योजना को भारत को वैश्विक टेक मंच पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।
साक्षात्कार के दौरान प्रोफेसर करंदीकर ने 1 लाख करोड़ रुपये के व्यापक रणनीति का विवरण दिया, जिसका उद्देश्य भारत के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को तेज करना है। यह योजना अनुसंधान व विकास, प्रतिभा संवर्धन और बुनियादी ढाँचे के उन्नयन पर केंद्रित है।
होस्ट ने इस पहल को अकादमी, उद्योग और सरकार के बीच सेतु बनाने के रूप में रेखांकित किया, जिससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा मिले।
करंदीकर ने सतत निवेश और नीति समर्थन की आवश्यकता पर बल दिया, यह बताते हुए कि प्रस्तावित बजट अगले दशक में चरणबद्ध रूप से आवंटित किया जाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
इस एपिसोड ने नीति निर्माताओं, उद्योग के नेताओं और आम जनता से व्यापक ध्यान आकर्षित किया, जो इस योजना को भारत को वैश्विक टेक मंच पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं।