📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Henry Raeburn
स्वास्थ्य
यूके मंत्री ने भारत-यूके स्वास्थ्य नवाचार सहयोग को तेज करने का आह्वान किया
✍️ Business Standard
🗓 01 नव. 2026, 06:01 AM
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एक वरिष्ठ यूके मंत्री ने भारत और यूके के बीच स्वास्थ्य नवाचार व अपनाने को तेज करने की मांग की, जिससे दोनों देशों को लाभ होगा।
एक वरिष्ठ यूके मंत्री ने दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य नवाचार और नई चिकित्सा तकनीकों के तेज़ अपनाने के लिए सहयोग को तेज़ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गहरा सहयोग स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को हल करने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए बाजार अवसर पैदा करने में मदद करेगा। नियामक ढाँचे को मिलाकर और शोध डेटा साझा करके डिजिटल स्वास्थ्य उपकरण और उन्नत उपचारों को जल्दी से लागू किया जा सकता है। यह आग्रह भारतीय और ब्रिटिश बायोटेक कंपनियों की बढ़ती रुचि के बीच आया है, जो एक-दूसरे की विशेषज्ञता और रोगी आधार का लाभ उठाना चाहती हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों से उम्मीद है कि द्विपक्षीय स्वास्थ्य संवादों में ठोस कदमों पर चर्चा होगी।
मंत्री ने व्यापार मीडिया के साथ एक ब्रीफ़िंग में बताया कि मौजूदा समझौते आधार प्रदान करते हैं, पर कार्यान्वयन अधिक चुस्त होना चाहिए। उन्होंने वैक्सीन विकास और टेलीमेडिसिन जैसे सफल संयुक्त प्रोजेक्टों को विस्तार के उदाहरण के रूप में उल्लेख किया। नवाचारों के आदान‑प्रदान को तेज़ करके यूके अपना वैश्विक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी केंद्र बनना चाहता है, जबकि भारत सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को साकार करना चाहता है।
फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइस और डिजिटल हेल्थ क्षेत्रों के हितधारकों ने इस अपील का स्वागत किया है और पायलट प्रोग्राम और संयुक्त शोध पहलों में भाग लेने की इच्छा जताई है। दोनों सरकारों से उम्मीद है कि वे फंडिंग, नियामक समन्वय और प्रतिभा विनिमय योजनाओं को शामिल करते हुए एक रोडमैप तैयार करें, जिससे सहयोगी विचारों को नागरिकों के लिए ठोस स्वास्थ्य परिणामों में बदला जा सके।
मंत्री ने व्यापार मीडिया के साथ एक ब्रीफ़िंग में बताया कि मौजूदा समझौते आधार प्रदान करते हैं, पर कार्यान्वयन अधिक चुस्त होना चाहिए। उन्होंने वैक्सीन विकास और टेलीमेडिसिन जैसे सफल संयुक्त प्रोजेक्टों को विस्तार के उदाहरण के रूप में उल्लेख किया। नवाचारों के आदान‑प्रदान को तेज़ करके यूके अपना वैश्विक स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी केंद्र बनना चाहता है, जबकि भारत सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रणी बनने की अपनी महत्वाकांक्षा को साकार करना चाहता है।
फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइस और डिजिटल हेल्थ क्षेत्रों के हितधारकों ने इस अपील का स्वागत किया है और पायलट प्रोग्राम और संयुक्त शोध पहलों में भाग लेने की इच्छा जताई है। दोनों सरकारों से उम्मीद है कि वे फंडिंग, नियामक समन्वय और प्रतिभा विनिमय योजनाओं को शामिल करते हुए एक रोडमैप तैयार करें, जिससे सहयोगी विचारों को नागरिकों के लिए ठोस स्वास्थ्य परिणामों में बदला जा सके।