📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Alok Singh Oberoi
बिज़नेस
तुकराम मुंधे ने मेडिकल डिवाइस प्राइसिंग पर नई योजना पेश की: MRP बनाम प्रोक्योरमेंट अंतर
✍️ Livemint
🗓 16 सित. 2026, 01:46 PM
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तुकराम मुंधे ने मेडिकल डिवाइस के MRP और प्रोक्योरमेंट कीमतों के बीच अंतर को उजागर करते हुए नई योजना जारी की है।
तुकराम मुंधे ने मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में मूल्य अंतर को दूर करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना पेश की है। यह योजना निर्माता द्वारा सुझाए गए खुदरा मूल्य (MRP) और सरकार व निजी खरीदारों द्वारा चुकाई जाने वाली वास्तविक प्रोक्योरमेंट कीमतों के बीच के अंतर पर केंद्रित है।
MRP और प्रोक्योरमेंट लागत के बीच के अंतर को उजागर करके, यह पहल आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य निर्धारण तंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। योजना आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य निर्धारण तंत्र की कड़ी निगरानी की भी मांग करती है।
निर्माता, वितरक और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता सहित हितधारकों से अपेक्षा है कि वे प्रस्तावित उपायों की समीक्षा करें और अपनी प्रोक्योरमेंट रणनीतियों को उसी के अनुसार समायोजित करें। यह कदम सार्वजनिक और निजी संस्थानों को लागत‑प्रभावी दरों पर मेडिकल डिवाइस उपलब्ध कराने के लिए एक कदम माना जा रहा है।
मुंधे की कार्य योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिसमें पहला चरण अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों में उपयोग होने वाले उच्च मात्रा वाले मेडिकल डिवाइस पर केंद्रित होगा। अधिकारियों द्वारा प्रभाव की निगरानी की जाएगी और उद्योग प्रतिभागियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर दिशानिर्देशों को परिष्कृत किया जाएगा।
MRP और प्रोक्योरमेंट लागत के बीच के अंतर को उजागर करके, यह पहल आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य निर्धारण तंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखती है। योजना आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य निर्धारण तंत्र की कड़ी निगरानी की भी मांग करती है।
निर्माता, वितरक और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता सहित हितधारकों से अपेक्षा है कि वे प्रस्तावित उपायों की समीक्षा करें और अपनी प्रोक्योरमेंट रणनीतियों को उसी के अनुसार समायोजित करें। यह कदम सार्वजनिक और निजी संस्थानों को लागत‑प्रभावी दरों पर मेडिकल डिवाइस उपलब्ध कराने के लिए एक कदम माना जा रहा है।
मुंधे की कार्य योजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिसमें पहला चरण अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों में उपयोग होने वाले उच्च मात्रा वाले मेडिकल डिवाइस पर केंद्रित होगा। अधिकारियों द्वारा प्रभाव की निगरानी की जाएगी और उद्योग प्रतिभागियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर दिशानिर्देशों को परिष्कृत किया जाएगा।