📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Commerce and Industry (India)
विदेश
त्रिनिदाद‑टॉबैगो राजदूत ने कहा, भारत दक्षिण‑दक्षिण सहयोग में आगे
✍️ Asianet Newsable
🗓 29 सित. 2026, 01:16 AM
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त्रिनिदाद‑टॉबैगो के राजदूत ने कहा कि भारत विकासशील देशों के बीच दक्षिण‑दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाने को तैयार है।
नई दिल्ली – त्रिनिदाद‑टॉबैगो के राजदूत ने एशियनट न्यूज़ेबल को बताया कि भारत दक्षिण‑दक्षिण सहयोग में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है, जिससे विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच नई कूटनीतिक ऊर्जा का संकेत मिलता है।
दक्षिण‑दक्षिण सहयोग, जो उभरते और विकासशील देशों के बीच पारस्परिक सहायता को प्रोत्साहित करता है, में भारत ने हाल के वर्षों में प्रौद्योगिकी, क्षमता‑निर्माण और व्यापार सुविधा जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया है। राजदूत ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और डिजिटल सेवाओं में भारत का अनुभव इसे व्यापक सहयोग का प्राकृतिक उत्प्रेरक बनाता है।
"भारत की नेतृत्व करने की तत्परता उसकी रणनीतिक रुचियों और साझा विकास लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है," उन्होंने कहा, और उल्लेख किया कि त्रिनिदाद‑टॉबैगो के साथ द्विपक्षीय संबंध व्यापक क्षेत्रीय पहल के लिए एक परीक्षण मंच बन सकते हैं।
भविष्य के प्रोजेक्ट्स में जलवायु लचीलापन, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, जहाँ भारत ने पहले ही कई आउटरीच कार्यक्रम शुरू किए हैं।
यह बयान भारत को वैश्विक दक्षिण के बीच एक कड़ी के रूप में स्थापित करने की कूटनीतिक दिशा को रेखांकित करता है, जिसका लक्ष्य महाद्वीपों में व्यापार, ज्ञान‑विनिमय और संयुक्त उद्यमों को गहरा करना है।
दक्षिण‑दक्षिण सहयोग, जो उभरते और विकासशील देशों के बीच पारस्परिक सहायता को प्रोत्साहित करता है, में भारत ने हाल के वर्षों में प्रौद्योगिकी, क्षमता‑निर्माण और व्यापार सुविधा जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया है। राजदूत ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और डिजिटल सेवाओं में भारत का अनुभव इसे व्यापक सहयोग का प्राकृतिक उत्प्रेरक बनाता है।
"भारत की नेतृत्व करने की तत्परता उसकी रणनीतिक रुचियों और साझा विकास लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है," उन्होंने कहा, और उल्लेख किया कि त्रिनिदाद‑टॉबैगो के साथ द्विपक्षीय संबंध व्यापक क्षेत्रीय पहल के लिए एक परीक्षण मंच बन सकते हैं।
भविष्य के प्रोजेक्ट्स में जलवायु लचीलापन, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, जहाँ भारत ने पहले ही कई आउटरीच कार्यक्रम शुरू किए हैं।
यह बयान भारत को वैश्विक दक्षिण के बीच एक कड़ी के रूप में स्थापित करने की कूटनीतिक दिशा को रेखांकित करता है, जिसका लक्ष्य महाद्वीपों में व्यापार, ज्ञान‑विनिमय और संयुक्त उद्यमों को गहरा करना है।