📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
धर्म
पटना से 54 फीट के विशाल कांवड़ लेकर हजारों शिवभक्त 50 किमी की पैदल यात्रा कर बिहटा पहुंचे
✍️ Amar Ujala · Bihar
🗓 24 सित. 2026, 04:02 PM
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हजारों शिवभक्त पटना सिटी से लगभग 50 किलोमीटर पैदल चलकर 54 फीट के विशाल कांवड़ लेकर बिहटा पहुँचे, रास्ते भर “हर‑हर महादेव” का जश्न मनाते हुए बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया।
पटना सिटी में शनिवार को एक विशाल शिवभक्तों की कांवड़ यात्रा शुरू हुई, जिसमें हजारों श्रद्धालु 54 फीट ऊँचा कांवड़ लेकर लगभग 50 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर बिहटा स्थित बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर तक पहुँचे। रास्ते भर “हर‑हर महादेव” और “बोल बम” के जयकारे गूँजते रहे, जिससे यात्रा का माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
भोर से शुरू हुई इस यात्रा में भक्तों ने समूहों में चलकर बीच‑बीच में प्रार्थना और जलपान किया। कांवड़ की विशालता ने स्थानीय लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया, जो बिहार में हर साल आयोजित कांवड़ यात्रा की भव्यता को दर्शाता है।
बिहटा पहुँचते ही श्रद्धालुओं ने बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया, जहाँ पुजारी ने भक्तों का स्वागत किया और पवित्र जल से देवता की मूर्ति पर अभिषेक किया। मंदिर के प्रांगण में जयकारे की गूँज जारी रही, जिससे श्रद्धा की लहर और भी तीव्र हो गई।
स्थानीय प्रशासन ने यात्री सुरक्षा के लिए ट्रैफ़िक प्रबंधन और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाईं। यह आयोजन बिहार में शिवभक्तों की अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है।
आयोजकों ने बताया कि यात्रा के अंत में एक सामुदायिक भोजन का आयोजन होगा, जिससे भाग लेने वाले सभी एकजुटता और साझा विश्वास का अनुभव करेंगे।
भोर से शुरू हुई इस यात्रा में भक्तों ने समूहों में चलकर बीच‑बीच में प्रार्थना और जलपान किया। कांवड़ की विशालता ने स्थानीय लोगों और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया, जो बिहार में हर साल आयोजित कांवड़ यात्रा की भव्यता को दर्शाता है।
बिहटा पहुँचते ही श्रद्धालुओं ने बाबा बिहटेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया, जहाँ पुजारी ने भक्तों का स्वागत किया और पवित्र जल से देवता की मूर्ति पर अभिषेक किया। मंदिर के प्रांगण में जयकारे की गूँज जारी रही, जिससे श्रद्धा की लहर और भी तीव्र हो गई।
स्थानीय प्रशासन ने यात्री सुरक्षा के लिए ट्रैफ़िक प्रबंधन और बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाईं। यह आयोजन बिहार में शिवभक्तों की अटूट श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है।
आयोजकों ने बताया कि यात्रा के अंत में एक सामुदायिक भोजन का आयोजन होगा, जिससे भाग लेने वाले सभी एकजुटता और साझा विश्वास का अनुभव करेंगे।