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धनतेरस: 6 नवंबर को धन्वंतरि एवं लक्ष्मी की विशेष पूजा
धनतेरस के पावन दिन 6 नवंबर को आचार्य अजय शुक्ल के मार्गदर्शन में दीपावली की शुरुआत के रूप में भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के शुभ मुहूर्त और यम दीपदान की परंपरा पर प्रकाश डाला गया।
धनतेरस का पावन पर्व शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली के पाँच दिवसीय महापर्व का शुभारंभ धनतेरस से होता है, और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस कारण इस दिन को धन्वंतरि जयंती और धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है।
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह लगभग 10:31 बजे प्रारंभ होगी और 7 नवंबर शनिवार को सुबह लगभग 10:48 बजे तक रहेगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:50 बजे से 7:47 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:19 बजे से 7:54 बजे तक रहेगा, और इसी अवधि में यम दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
रविवार के दिन प्रातःकाल घर की साफ‑सफाई कर मुख्य द्वार पर रंगोली बनाना, संध्या समय दीप प्रज्वलित करना और भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना अनिवार्य माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तन अथवा अपनी सामर्थ्य के अनुसार घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है, जिससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन आरोग्य की कामना के साथ उनकी पूजा का विशेष महत्व है, और यह परिवार के स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बनाता है।
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर शुक्रवार को सुबह लगभग 10:31 बजे प्रारंभ होगी और 7 नवंबर शनिवार को सुबह लगभग 10:48 बजे तक रहेगी। धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:50 बजे से 7:47 बजे तक रहेगा। प्रदोष काल शाम 5:19 बजे से 7:54 बजे तक रहेगा, और इसी अवधि में यम दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
रविवार के दिन प्रातःकाल घर की साफ‑सफाई कर मुख्य द्वार पर रंगोली बनाना, संध्या समय दीप प्रज्वलित करना और भगवान धन्वंतरि की पूजा करके परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना अनिवार्य माना जाता है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबे के बर्तन अथवा अपनी सामर्थ्य के अनुसार घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है, जिससे परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन आरोग्य की कामना के साथ उनकी पूजा का विशेष महत्व है, और यह परिवार के स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बनाता है।