स्थानीय
दिल्ली पुलिस में बगावत के सुर! ACP और इंस्पेक्टर के तबादले पर जवानों का हल्लाबोल.
यहाँ देखें:
📘 Facebook
जिस खाकी पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी, वही मांगने लगी इंसाफ! दिल्ली पुलिस मुख्यालय में ऐतिहासिक प्रदर्शन।
नई दिल्ली।02 नवंबर राजधानी दिल्ली में सोमवार को एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हलचल मचा दी। जिस दिल्ली पुलिस को अनुशासन और कानून-व्यवस्था की मिसाल माना जाता है, उसी पुलिस के जवान अपने ही विभाग के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। दिल्ली पुलिस मुख्यालय में पहली बार पुलिसकर्मियों की ओर से विरोध के नारे गूंजे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष और महिला पुलिसकर्मी शामिल हुए।
दरअसल, पूरा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। 23 अक्टूबर को हुए विवाद के बाद एक वकील के घायल होने का मामला सामने आया था। इसके बाद वकीलों ने हड़ताल की थी। विवाद के बीच गांधी नगर के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया। इसी फैसले से पुलिसकर्मियों में नाराजगी फैल गई।
पुलिसकर्मियों का आरोप था कि वकीलों के दबाव में अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिससे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हुआ है। इसी के विरोध में जवान दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंच गए और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के साथ बैठक करनी पड़ी। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की ओर से प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द नहीं करने, बार काउंसिल सदस्य का नाम मुकदमे से नहीं हटाने और प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की मांग शामिल रही।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के भीतर इस तरह की नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन ने पुलिस विभाग के अनुशासन, जवानों के मनोबल और वरिष्ठ अधिकारियों के फैसलों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन इस असंतोष को किस तरह दूर करता है।
दरअसल, पूरा मामला पूर्वी दिल्ली के शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। 23 अक्टूबर को हुए विवाद के बाद एक वकील के घायल होने का मामला सामने आया था। इसके बाद वकीलों ने हड़ताल की थी। विवाद के बीच गांधी नगर के एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया। इसी फैसले से पुलिसकर्मियों में नाराजगी फैल गई।
पुलिसकर्मियों का आरोप था कि वकीलों के दबाव में अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिससे पुलिस बल का मनोबल प्रभावित हुआ है। इसी के विरोध में जवान दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंच गए और अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी भी चर्चा का विषय रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारियों को प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के साथ बैठक करनी पड़ी। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ की ओर से प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमे रद्द नहीं करने, बार काउंसिल सदस्य का नाम मुकदमे से नहीं हटाने और प्रदर्शन में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की मांग शामिल रही।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के भीतर इस तरह की नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन ने पुलिस विभाग के अनुशासन, जवानों के मनोबल और वरिष्ठ अधिकारियों के फैसलों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस प्रशासन इस असंतोष को किस तरह दूर करता है।