📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tata projects
बिज़नेस
टाटा प्रोजेक्ट्स को गुजरात में एसिड कॉम्प्लेक्स के लिए जीएसएफसी का ऑर्डर
✍️ The Economic Times
🗓 28 अक्टू. 2026, 04:03 PM
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टाटा प्रोजेक्ट्स को गुजरात राज्य के रासायनिक कंपनी जीएसएफसी ने गुजरात में एक एसिड कॉम्प्लेक्स बनाने का अनुबंध दिया है, जैसा कि इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया।
टाटा प्रोजेक्ट्स, एक प्रमुख इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं इंजीनियरिंग कंपनी, ने बताया कि उसे गुजरात राज्य के रासायनिक उद्यम गुजरात स्टेट फर्टिलाइज़र एंड केमिकल्स (जीएसएफसी) से नया अनुबंध मिला है। इस आदेश के तहत गुजरात में एक एसिड कॉम्प्लेक्स का डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन किया जाएगा। यह परियोजना जीएसएफसी की एसिड उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद करेगी, जो उर्वरक निर्माण में आवश्यक है। टाटा प्रोजेक्ट्स ने कहा कि यह अनुबंध कंपनी की रसायन और उर्वरक क्षेत्र में विस्तार की रणनीति के अनुरूप है और जल्द ही विस्तृत योजना कार्य शुरू किया जाएगा।
यह समझौता गुजरात में रसायनिक बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को दर्शाता है, जहाँ देश के अधिकांश उर्वरक उद्योग स्थित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएँ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देंगी और राज्य की औद्योगिक वृद्धि में योगदान देंगी। टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध की वित्तीय राशि नहीं बताई, पर इसे अपने प्रोजेक्ट पाइपलाइन में एक महत्वपूर्ण जोड़ कहा।
जीएसएफसी, एक राज्य‑स्वामित्व वाली कंपनी, अपने उत्पादन सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रही है ताकि घरेलू उर्वरक मांग को पूरा किया जा सके। नया एसिड कॉम्प्लेक्स पुराने यूनिटों को प्रतिस्थापित करेगा और संचालन दक्षता तथा पर्यावरणीय अनुपालन को बेहतर बनाएगा। दोनों पक्ष आशा करते हैं कि नियामक मंजूरी मिलने पर परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो जाएगी।
यह समझौता गुजरात में रसायनिक बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को दर्शाता है, जहाँ देश के अधिकांश उर्वरक उद्योग स्थित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएँ स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देंगी और राज्य की औद्योगिक वृद्धि में योगदान देंगी। टाटा प्रोजेक्ट्स ने अनुबंध की वित्तीय राशि नहीं बताई, पर इसे अपने प्रोजेक्ट पाइपलाइन में एक महत्वपूर्ण जोड़ कहा।
जीएसएफसी, एक राज्य‑स्वामित्व वाली कंपनी, अपने उत्पादन सुविधाओं को आधुनिक बनाने पर ध्यान दे रही है ताकि घरेलू उर्वरक मांग को पूरा किया जा सके। नया एसिड कॉम्प्लेक्स पुराने यूनिटों को प्रतिस्थापित करेगा और संचालन दक्षता तथा पर्यावरणीय अनुपालन को बेहतर बनाएगा। दोनों पक्ष आशा करते हैं कि नियामक मंजूरी मिलने पर परियोजना निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो जाएगी।