📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
बिज़नेस
तमसाक सुधार रुके, तमिलनाडु के शराब की दुकानों में 90 के दशक की ही रीतियाँ
✍️ The Times of India
🗓 06 नव. 2026, 11:01 AM
👁 18
तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (तमसाक) के प्रस्तावित सुधार अभी तक लागू नहीं हुए हैं, जिससे उसकी शराब की दुकानों में 1990 के दशक की पुरानी प्रणाली अभी भी चल रही है, टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया।
तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (तमसाक), जो राज्य में शराब की बिक्री का प्रबंधन करता है, ने अपने रिटेल नेटवर्क को आधुनिकीकरण करने के लिए कई सुधार प्रस्तावित किए हैं। लेकिन हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ये सुधार अभी तक कागज़ों तक सीमित रह गए हैं और जमीन पर लागू नहीं हुए हैं।
जांच से पता चलता है कि कई तमसाक दुकानों में अभी भी 1990 के दशक के मूल्य निर्धारण, इन्वेंट्री और सेवा प्रक्रियाएँ चल रही हैं। स्टाफ प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार जैसे प्रस्तावित कदम अभी तक लागू नहीं हुए हैं।
राज्य के अधिकारियों ने नीति और कार्यान्वयन के बीच अंतर को स्वीकार किया है, और इसे प्रशासनिक देरी तथा बजट प्रतिबंधों को मुख्य कारण बताया है। उपभोक्ता समूहों ने इस बात पर चिंता जताई है कि पुरानी दुकानों के कारण विकल्प सीमित होते हैं, कीमतों में पारदर्शिता नहीं रहती और निगम की आय पर असर पड़ता है।
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि तेज़ी से कार्यान्वयन न होने पर तमसाक निजी प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह सकता है, जिन्होंने पहले ही आधुनिक रिटेल तकनीकें अपनाई हैं। निगम के नेतृत्व ने चरणबद्ध कार्यान्वयन पर विचार बताया है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है।
यह स्थिति तमिलनाडु के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए एक व्यापक चुनौती को उजागर करती है: नीति को नागरिकों के लिए ठोस सुधारों में बदलना।
जांच से पता चलता है कि कई तमसाक दुकानों में अभी भी 1990 के दशक के मूल्य निर्धारण, इन्वेंट्री और सेवा प्रक्रियाएँ चल रही हैं। स्टाफ प्रशिक्षण, डिजिटल भुगतान और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार जैसे प्रस्तावित कदम अभी तक लागू नहीं हुए हैं।
राज्य के अधिकारियों ने नीति और कार्यान्वयन के बीच अंतर को स्वीकार किया है, और इसे प्रशासनिक देरी तथा बजट प्रतिबंधों को मुख्य कारण बताया है। उपभोक्ता समूहों ने इस बात पर चिंता जताई है कि पुरानी दुकानों के कारण विकल्प सीमित होते हैं, कीमतों में पारदर्शिता नहीं रहती और निगम की आय पर असर पड़ता है।
उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि तेज़ी से कार्यान्वयन न होने पर तमसाक निजी प्रतिस्पर्धियों से पीछे रह सकता है, जिन्होंने पहले ही आधुनिक रिटेल तकनीकें अपनाई हैं। निगम के नेतृत्व ने चरणबद्ध कार्यान्वयन पर विचार बताया है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है।
यह स्थिति तमिलनाडु के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए एक व्यापक चुनौती को उजागर करती है: नीति को नागरिकों के लिए ठोस सुधारों में बदलना।