📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
खानपान
तमिलनाडु सरकार स्कूल मध्याह्न भोजन में साप्ताहिक चिकन बिरयानी जोड़ने पर विचार
✍️ News18
🗓 25 अक्टू. 2026, 02:17 AM
👁 17
तमिलनाडु सरकार स्कूल के मध्याह्न भोजन में साप्ताहिक चिकन बिरयानी शामिल करने के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है।
तमिलनाडु राज्य सरकार ने स्कूलों के मध्याह्न भोजन में साप्ताहिक चिकन बिरयानी शामिल करने के एक मसौदा प्रस्ताव की समीक्षा शुरू कर दी है। यह पहल मौजूदा चावल‑दाल के मेन्यू को विविधता प्रदान करने और विशेषकर उन जिलों में बच्चों की प्रोटीन सेवन बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई है जहाँ कुपोषण की समस्या अभी भी बनी हुई है।
अधिकारियों के अनुसार, बिरयानी को स्कूल किचन में वही गुणवत्ता नियंत्रण मानकों के तहत तैयार किया जाएगा जो वर्तमान भोजन में लागू होते हैं। प्रस्ताव में प्रति बच्चे अतिरिक्त लागत को कवर करने के लिए शिक्षा बजट में एक छोटा बढ़ोतरी करने का भी उल्लेख है, जिससे मांस और मसालों की कीमतें संभाली जा सकें।
इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। पोषण विशेषज्ञ प्रोटीन‑समृद्ध विकल्प को सकारात्मक मानते हैं, जबकि कुछ अभिभावक समूहों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि सभी बच्चों के लिये, चाहे उनकी आहार प्राथमिकताएँ कुछ भी हों, मांस को शामिल करना उचित है या नहीं। विभाग ने कहा है कि पहले कुछ जिलों में पायलट परीक्षण किया जाएगा, उसके बाद ही पूरी राज्य में लागू किया जाएगा।
अभी तक अंतिम निर्णय की तिथि तय नहीं हुई है और प्रस्ताव शिक्षा तथा वित्त मंत्रालयों की समीक्षा में बना हुआ है।
अधिकारियों के अनुसार, बिरयानी को स्कूल किचन में वही गुणवत्ता नियंत्रण मानकों के तहत तैयार किया जाएगा जो वर्तमान भोजन में लागू होते हैं। प्रस्ताव में प्रति बच्चे अतिरिक्त लागत को कवर करने के लिए शिक्षा बजट में एक छोटा बढ़ोतरी करने का भी उल्लेख है, जिससे मांस और मसालों की कीमतें संभाली जा सकें।
इस कदम पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। पोषण विशेषज्ञ प्रोटीन‑समृद्ध विकल्प को सकारात्मक मानते हैं, जबकि कुछ अभिभावक समूहों ने इस बात पर सवाल उठाए हैं कि सभी बच्चों के लिये, चाहे उनकी आहार प्राथमिकताएँ कुछ भी हों, मांस को शामिल करना उचित है या नहीं। विभाग ने कहा है कि पहले कुछ जिलों में पायलट परीक्षण किया जाएगा, उसके बाद ही पूरी राज्य में लागू किया जाएगा।
अभी तक अंतिम निर्णय की तिथि तय नहीं हुई है और प्रस्ताव शिक्षा तथा वित्त मंत्रालयों की समीक्षा में बना हुआ है।