📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
राजनीति
तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई में बदलाव, विपक्ष ने जताया विरोध
✍️ indiatoday.in
🗓 27 सित. 2026, 07:38 PM
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तमिलनाडु सरकार ने आरटीआई के कुछ प्रावधानों को घटाया, जिससे विपक्ष में तीखा विरोध और मंत्री टीवीके ने अपनी स्थिति बदल ली।
चेन्नई, 27 सितंबर — तमिलनाडु सरकार ने इस सप्ताह सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के कुछ प्रावधानों को घटाने का आदेश जारी किया। यह बदलाव प्रशासनिक दक्षता और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा को कारण बताते हुए नागरिकों द्वारा मांगी जा सकने वाली जानकारी की सीमा को सीमित करता है।
विरोधी दलों ने तुरंत इस कदम की निंदा की, इसे पारदर्शिता के क्षरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही के पीछे हटने के रूप में पेश किया। कई नेता विधान सभा के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और संशोधन को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
एक अप्रत्याशित मोड़ में, वरिष्ठ मंत्री टी.वी.के. ने अपनी प्रारंभिक समर्थन को वापस ले लिया, यह कहा कि सरकार को नागरिक समाज के साथ परामर्श के बाद इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। मंत्री का यह यू‑टर्न राज्य के मुख्य मंत्री के कार्यालय पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है।
राज्य के आरटीआई आयुक्त ने हितधारकों के साथ एक बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि प्रस्तावित बदलावों के व्यावहारिक प्रभावों पर चर्चा की जा सके। साथ ही, कानूनी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आरटीआई ढांचे में कोई भी ढीलाई अदालत में चुनौती का कारण बन सकती है।
यह घटना शासक दल के सुधार एजेंडा और पारदर्शिता की मांग करने वाले विपक्ष के बीच चल रहे टकराव को उजागर करती है।
विरोधी दलों ने तुरंत इस कदम की निंदा की, इसे पारदर्शिता के क्षरण और लोकतांत्रिक जवाबदेही के पीछे हटने के रूप में पेश किया। कई नेता विधान सभा के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और संशोधन को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
एक अप्रत्याशित मोड़ में, वरिष्ठ मंत्री टी.वी.के. ने अपनी प्रारंभिक समर्थन को वापस ले लिया, यह कहा कि सरकार को नागरिक समाज के साथ परामर्श के बाद इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। मंत्री का यह यू‑टर्न राज्य के मुख्य मंत्री के कार्यालय पर अतिरिक्त दबाव बना रहा है।
राज्य के आरटीआई आयुक्त ने हितधारकों के साथ एक बैठक बुलाने का प्रस्ताव रखा है, ताकि प्रस्तावित बदलावों के व्यावहारिक प्रभावों पर चर्चा की जा सके। साथ ही, कानूनी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि आरटीआई ढांचे में कोई भी ढीलाई अदालत में चुनौती का कारण बन सकती है।
यह घटना शासक दल के सुधार एजेंडा और पारदर्शिता की मांग करने वाले विपक्ष के बीच चल रहे टकराव को उजागर करती है।