📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Michael Gäbler
अपराध
तमिलनाडु बस संकेत बोर्डों पर फिर से राजनीतिक नारे लिखे गए
✍️ NDTV
🗓 16 अक्टू. 2026, 09:32 PM
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तमिलनाडु के सरकारी बस संकेत बोर्डों पर फिर से राजनीतिक नारे लिखे गए, NDTV ने बताया। इस बार की हैकिंग की जांच अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम ने बताया कि कई बस संकेत बोर्डों को तोड़‑फोड़ कर राजनीतिक नारे लिखे गए हैं, जो पहले की घटना के समान है। यह तोड़‑फोड़ सोमवार सुबह नियमित जाँच के दौरान उजागर हुई, जिससे तुरंत परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस को सूचना मिली।
पुलिस ने बताया कि नारे हाथ से लगाए गए लगते हैं, परन्तु इतनी तेज़ी और समन्वय से यह कार्य पूर्व‑योजना जैसा दिखता है। अभी तक दोषियों की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन डिपो और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
परिवहन मंत्रालय ने यात्रियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि संकेत बोर्डों को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। यह घटना सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और राजनीतिक संदेशों के उपयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ा रही है।
कोई चोट या सेवा में बाधा नहीं आई, और प्रभावित बसें अपने नियमित मार्ग पर चलती रही। विभाग अब संकेत बोर्डों की सुरक्षा प्रक्रियाओं की पुनः समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे जोखिम कम हो सकें।
यह मामला राज्य में सरकारी संपत्ति को लक्षित कई हालिया तोड़‑फोड़ घटनाओं में से एक है, जिससे राजनीतिक संदेशों के पीछे के इरादों और कड़ी निगरानी की आवश्यकता पर सवाल उठते हैं।
पुलिस ने बताया कि नारे हाथ से लगाए गए लगते हैं, परन्तु इतनी तेज़ी और समन्वय से यह कार्य पूर्व‑योजना जैसा दिखता है। अभी तक दोषियों की पहचान नहीं हो पाई है, लेकिन डिपो और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
परिवहन मंत्रालय ने यात्रियों से शांति बनाए रखने का अनुरोध किया और कहा कि संकेत बोर्डों को जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। यह घटना सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और राजनीतिक संदेशों के उपयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ा रही है।
कोई चोट या सेवा में बाधा नहीं आई, और प्रभावित बसें अपने नियमित मार्ग पर चलती रही। विभाग अब संकेत बोर्डों की सुरक्षा प्रक्रियाओं की पुनः समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसे जोखिम कम हो सकें।
यह मामला राज्य में सरकारी संपत्ति को लक्षित कई हालिया तोड़‑फोड़ घटनाओं में से एक है, जिससे राजनीतिक संदेशों के पीछे के इरादों और कड़ी निगरानी की आवश्यकता पर सवाल उठते हैं।