📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
धर्म
ओंकारेश्वर में 95वीं शंकर व्याख्यानमाला में स्वामिनी तत्त्वप्रियानंद सरस्वती ने वेद प्रामाण्य पर विचार
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 27 सित. 2026, 08:00 PM
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ओंकारेश्वर में आयोजित 95वीं शंकर व्याख्यानमाला में स्वामिनी तत्त्वप्रियानंद सरस्वती ने वेदों की प्रामाणिकता, आत्मविद्या और वेदांत की आज की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
ओंकारेश्वर, मध्य प्रदेश में आयोजित 95वीं शंकर व्याख्यानमाला में वेदांत के प्रख्यात प्रवक्ता स्वामिनी तत्त्वप्रियानंद सरस्वती ने "वेद प्रामाण्यम विचार" शीर्षक से मुख्य व्याख्यान दिया।
स्वामिनी ने वेदों को आध्यात्मिक ज्ञान का सर्वोच्च स्रोत मानते हुए उनकी अंतर्संगति और शताब्दियों से चली आ रही मौखिक परम्परा को प्रामाणिकता के आधार के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वेद आज भी आधुनिक जीवन के प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हैं।
विचार में आत्मविद्या के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जहाँ व्यक्तिगत आत्म‑अनुशीलन को शास्त्र अध्ययन के साथ जोड़कर सम्पूर्ण आध्यात्मिक विकास की राह सुझाई गई।
समापन में वेदांत की समकालीन प्रासंगिकता पर बल दिया गया, यह कहा गया कि यह नैतिकता और आंतरिक शांति को बढ़ावा देने में मददगार हो सकता है। व्याख्यान के बाद उपस्थित श्रोताओं ने प्रश्न‑उत्तर सत्र में वेदों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की।
स्वामिनी ने वेदों को आध्यात्मिक ज्ञान का सर्वोच्च स्रोत मानते हुए उनकी अंतर्संगति और शताब्दियों से चली आ रही मौखिक परम्परा को प्रामाणिकता के आधार के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वेद आज भी आधुनिक जीवन के प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम हैं।
विचार में आत्मविद्या के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जहाँ व्यक्तिगत आत्म‑अनुशीलन को शास्त्र अध्ययन के साथ जोड़कर सम्पूर्ण आध्यात्मिक विकास की राह सुझाई गई।
समापन में वेदांत की समकालीन प्रासंगिकता पर बल दिया गया, यह कहा गया कि यह नैतिकता और आंतरिक शांति को बढ़ावा देने में मददगार हो सकता है। व्याख्यान के बाद उपस्थित श्रोताओं ने प्रश्न‑उत्तर सत्र में वेदों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर चर्चा की।