📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Diliff
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया
✍️ The New Indian Express
🗓 05 अक्टू. 2026, 05:38 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने हेतु कड़ी सजा और डर पैदा करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को देखते हुए दिल्ली पुलिस को "बहुत कड़ी" कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि अपराधियों में डर पैदा करना भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने का मुख्य उपाय है।
अदालत ने यह भी कहा कि अपराधियों को हल्के में लेना दोहराव वाले अपराधों को प्रोत्साहित करता है और जनता का पुलिस पर भरोसा घटाता है। इसलिए पुलिस को तेज़, सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिससे स्पष्ट चेतावनी मिले।
यह आदेश कई हाई‑प्रोफ़ाइल मामलों के बाद आया है, जिनसे पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े विरोध और सुरक्षा उपायों की मांग बढ़ी है। दिल्ली पुलिस ने मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा कर कोर्ट के सुझावों को तुरंत लागू करने का आश्वासन दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख 2013 के आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम जैसी मौजूदा क़ानूनों को सुदृढ़ करता है, साथ ही पुलिस में सक्रिय सोच को भी बढ़ावा देता है। कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी आगे की सुनवाइयों में की जाएगी।
यह आदेश न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कानून‑व्यवस्था नीतियों को दिशा देने में।
अदालत ने यह भी कहा कि अपराधियों को हल्के में लेना दोहराव वाले अपराधों को प्रोत्साहित करता है और जनता का पुलिस पर भरोसा घटाता है। इसलिए पुलिस को तेज़, सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिससे स्पष्ट चेतावनी मिले।
यह आदेश कई हाई‑प्रोफ़ाइल मामलों के बाद आया है, जिनसे पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े विरोध और सुरक्षा उपायों की मांग बढ़ी है। दिल्ली पुलिस ने मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा कर कोर्ट के सुझावों को तुरंत लागू करने का आश्वासन दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख 2013 के आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम जैसी मौजूदा क़ानूनों को सुदृढ़ करता है, साथ ही पुलिस में सक्रिय सोच को भी बढ़ावा देता है। कार्यान्वयन की प्रगति की निगरानी आगे की सुनवाइयों में की जाएगी।
यह आदेश न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है, विशेषकर महिलाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कानून‑व्यवस्था नीतियों को दिशा देने में।