📷 चित्र स्रोत: TOI City (via NewsData)
अपराध
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर विरोध में अवैध हिरासत के आरोप पर जुआनिद मलिक की शिकायत सुनी
✍️ TOI City
🗓 29 जुल. 2026, 12:41 PM
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जुआनिद मलिक, जो सीजेपी के जंतर मंतर विरोध में मुफ्त भोजन बाँटते थे, ने अवैध हिरासत, पुलिस पूछताछ और फ़ोन के जबरन अनलॉक के आरोप लगाते हुए याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनका मामला सुनने की सहमति दी है।
जुआनिद मलिक, जो सीजेपी के जंतर मंतर विरोध में मुफ्त भोजन बाँटते थे, ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक शिकायत दायर की है। उनका दावा है कि विरोध के दौरान उन्हें पुलिस द्वारा अवैध रूप से हिरासत में लिया गया और अधिकारियों ने उनके भोजन वितरण के स्रोतों के बारे में पूछताछ की।
मलिक का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनके मोबाइल फोन को जबरन अनलॉक किया, जिससे व्यक्तिगत डेटा बिना सहमति के एक्सेस किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार के सदस्यों को पुलिस अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
शिकायत के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों द्वारा की गई, जिससे राज्य सुरक्षा बलों के कर्तव्यों के दुरुपयोग पर सवाल उठते हैं। शिकायत में उनके अधिकारों के उल्लंघन के लिए सुधार और संबंधित अधिकारियों की जाँच की माँग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मलिक की याचिका सुनने की सहमति दी है, जो राजनीतिक विरोध से जुड़े पुलिस दुराचार के आरोपों को संबोधित करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले हफ्तों में सुनवाई का समय तय किया जा सकता है, जिसके बाद न्यायालय जांच या अन्य सुधारात्मक उपायों का आदेश दे सकता है।
मलिक का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उनके मोबाइल फोन को जबरन अनलॉक किया, जिससे व्यक्तिगत डेटा बिना सहमति के एक्सेस किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके परिवार के सदस्यों को पुलिस अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।
शिकायत के अनुसार, यह कार्रवाई पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों द्वारा की गई, जिससे राज्य सुरक्षा बलों के कर्तव्यों के दुरुपयोग पर सवाल उठते हैं। शिकायत में उनके अधिकारों के उल्लंघन के लिए सुधार और संबंधित अधिकारियों की जाँच की माँग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मलिक की याचिका सुनने की सहमति दी है, जो राजनीतिक विरोध से जुड़े पुलिस दुराचार के आरोपों को संबोधित करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले हफ्तों में सुनवाई का समय तय किया जा सकता है, जिसके बाद न्यायालय जांच या अन्य सुधारात्मक उपायों का आदेश दे सकता है।