📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Post of India
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों को केंद्र के अधिग्रहण को चुनौती देने की एचसी की अनुमति दी
✍️ India Today
🗓 05 अक्टू. 2026, 05:36 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के प्राचीन जिमखाना क्लब के सदस्यों को केंद्र के प्रस्तावित अधिग्रहण को चुनौती देने हेतु हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह आदेश दिया कि दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्य केंद्र द्वारा क्लब की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना को चुनौती देने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं। यह निर्णय उस औपनिवेशिक युग के संस्थान के 150 साल पुराने इतिहास को देखते हुए आया है, जिसने अपनी स्वायत्तता और विरासत को खतरे में पाते हुए आपत्ति जताई थी।
अदालत ने अभी तक कब्जे की वैधता पर कोई राय नहीं दी; केवल यह स्पष्ट किया कि सदस्य न्यायिक समीक्षा के लिए हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की ऐसी कार्रवाइयों को चुनौती देने के लिए संस्थागत अधिकारों को संरक्षित करने की अदालत की तत्परता को दर्शाता है।
केंद्र ने पहले सार्वजनिक हित के आधार पर क्लब की भूमि पर नियंत्रण लेने का इरादा जताया था। हालांकि, क्लब के सदस्य कहते हैं कि यह प्रक्रिया उचित परामर्श के बिना की गई है और क्लब के पारम्परिक शासन ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। अब हाई कोर्ट इस याचिका की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि कब्जा जारी रह सकता है या नहीं।
यह मामला देश भर के अन्य विरासत संस्थानों के लिए भी एक संकेत बन गया है, जो समान सरकारी हस्तक्षेप से डरते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह प्रक्रियात्मक आदेश कब्जे के बारे में अंतिम निर्णय नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने का कदम माना जा रहा है।
अदालत ने अभी तक कब्जे की वैधता पर कोई राय नहीं दी; केवल यह स्पष्ट किया कि सदस्य न्यायिक समीक्षा के लिए हाई कोर्ट में अपील कर सकते हैं। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की ऐसी कार्रवाइयों को चुनौती देने के लिए संस्थागत अधिकारों को संरक्षित करने की अदालत की तत्परता को दर्शाता है।
केंद्र ने पहले सार्वजनिक हित के आधार पर क्लब की भूमि पर नियंत्रण लेने का इरादा जताया था। हालांकि, क्लब के सदस्य कहते हैं कि यह प्रक्रिया उचित परामर्श के बिना की गई है और क्लब के पारम्परिक शासन ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। अब हाई कोर्ट इस याचिका की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि कब्जा जारी रह सकता है या नहीं।
यह मामला देश भर के अन्य विरासत संस्थानों के लिए भी एक संकेत बन गया है, जो समान सरकारी हस्तक्षेप से डरते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह प्रक्रियात्मक आदेश कब्जे के बारे में अंतिम निर्णय नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को सुगम बनाने का कदम माना जा रहा है।