📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pinakpani
नौकरी
सुप्रीम कोर्ट ने 1988 में आईओसी नौकरी से वंचित हरियाणा महिला को 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया
✍️ Hindustan Times
🗓 18 सित. 2026, 07:01 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने 1988 में इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन में नौकरी से वंचित हरियाणा की महिला को 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की एक महिला द्वारा 1988 में इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन (आईओसी) में नौकरी से वंचित होने के मामले पर फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने कहा था कि चयन प्रक्रिया में पक्षपात था और यह संविधान के समानता अधिकार का उल्लंघन है।
दस्तावेज़ों और गवाहियों की जांच के बाद न्यायालय ने पाया कि नौकरी से इनकार अवैध था और आईओसी को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही कंपनी को मुकदमे के खर्च भी वहन करने को कहा गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐतिहासिक रोजगार भेदभाव के मामलों को संबोधित करने में न्यायपालिका की तत्परता को दर्शाता है, भले ही घटनाएँ कई दशकों पुरानी हों। मुआवजा आज के मानकों के हिसाब से छोटा है, पर यह लंबी लड़ाई के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
यह निर्णय भारत में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में लिंग‑आधारित असमानताओं को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य‑स्वामित्व वाले उद्यमों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
दस्तावेज़ों और गवाहियों की जांच के बाद न्यायालय ने पाया कि नौकरी से इनकार अवैध था और आईओसी को 12 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही कंपनी को मुकदमे के खर्च भी वहन करने को कहा गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐतिहासिक रोजगार भेदभाव के मामलों को संबोधित करने में न्यायपालिका की तत्परता को दर्शाता है, भले ही घटनाएँ कई दशकों पुरानी हों। मुआवजा आज के मानकों के हिसाब से छोटा है, पर यह लंबी लड़ाई के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
यह निर्णय भारत में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में लिंग‑आधारित असमानताओं को कम करने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य‑स्वामित्व वाले उद्यमों में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया गया है।